लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल प्रशासन ने स्वाइन फ्लू के इलाज का प्रोटोकॉल तोड़कर मरीज को स्वाइन फ्लू वार्ड के बजाय इमरजेंसी में दूसरे मरीजों के साथ भर्ती कर दिया। वह हफ्तेभर इमरजेंसी में ही रहा। ऐसे में यहां पांच तीमारदार भी बीमार हो गए। वे सर्दी-जुखाम व बुखार से ग्रसित हैं। उन्हें स्वाइन फ्लू होने की आशंका है। सभी अस्पताल से दवा लेकर ठहरे हैं।
वहीं स्वाइन फ्लू मरीज की हालत बिगड़ने पर शनिवार को उसे केजीएमयू भेज दिया गया। वह वेंटिलेटर के लिए घंटों इंतजार करता रहा। तीमारदारों का आरोप है डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरतने पर विरोध किया तो केजीएमयू भेज दिया गया।
अयोध्या निवासी एक किशोर (17) को सांस लेने में तकलीफ व बुखार आने पर जिला अस्पताल से लखनऊ भेजा गया था। तीमारदारों ने बीते दो फरवरी को उसे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी ले गए। तीन फरवरी को केजीएमयू में जांच के बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। मरीज को स्वाइन फ्लू वार्ड में रखने के बजाय इमरजेंसी के दूसरे तल पर बने नर्सिंग स्टेशन के बगल में बने कमरे में रखा गया। इस दौरान पांच तीमारदारों के भी संक्रमण की चपेट में आने की आशंका है। सीतापुर से मरीज को लेकर आई महिला तीमारदार (34) जुखाम-बुखार व खांसी से ग्रसित हो गईं। इसी तरह न्यू बिल्डिंग पास रैन बसेरे में रुकी महिला (50), हरदोई से आए तीमारदार (30) समेत पांच मरीज बीमार हैं। तीमारदारों का कहना है कि करीब चार दिन बीत चुके हैं अस्पताल से दवा लेकर खा रहे हैं। अब सुधार है।
ठीक होने पर इमरजेंसी भेजा गया था मरीज
स्वाइन फ्लू का कोई प्रोटोकॉल तोड़कर मरीज को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया। मरीज आईसीयू में था, ठीक होने पर उसे इमरजेंसी में शिफ्ट कराया गया। - डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल