अपने नेताओं के कारण सरकार पहले दुर्गाशक्ति नागपाल को हटाने के कारण विवादों में घिरी थी।
चंद दिनों बाद, लखीमपुर खीरी से वहां की डीएम मनीषा त्रिघटिया को लेखपालों के भ्रष्टाचार पर काबू न कर पाने के बचकाने आरोप में हटाया गया।
वहां के सपा नेता उनसे खफा थे। ताजा लिस्ट में एक और नाम जुड़ गया, फतेहपुर डीएम पद से हटाई गईं कंचन वर्मा का।
पुरुष अफसरों से तो नेताओं की जमात अपने तरीके से निपट लेती है, वे दबाव में भी आ जाते हैं। मुश्किल महिला अफसरों के साथ आती है।
सरकार की भी मजबूरी है, लोकसभा चुनाव से पहले वह अपनी पार्टी के नेताओं को नाराज भी नहीं करना चाहती। नतीजतन, अफसर को ही हटना पड़ता है।