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UP News: 'पहले 547 लाख मीट्रिक टन था खाद्यान्न उत्पादन', कृषि मंत्री बोले- 9 वर्षों में 737 लाख मीट्रिक टन हुआ

Sat, 21 Mar 2026 09:03 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने यूपी को बीमारू से सर्वोत्तम प्रदेश बनाया। 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ किया गया। साथ ही किसानों को 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के देवरिया में शनिवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पत्रकार वार्ता की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि योगी सरकार के 9 वर्षों में कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है। इसमें किसानों को सीधा लाभ, सिंचाई विस्तार, उत्पादन वृद्धि और नए कृषि मॉडल स्थापित किया जाना शामिल हैं। सरकार ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की दिशा में अग्रसर किया है।

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कृषि मंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार, अपहरण, फिरौती, माफियाराज और जंगलराज का बोलबाला था। अब इसे समाप्त किया जा चुका है। 9 वर्ष पहले किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होते थे। वे हताश और निराश थे। भय के वातावरण में जी रहे थे। खाद, बिजली व पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। सरकार किसानों की उपज की खरीद भी नहीं करती थी। गन्ना किसानों का भुगतान तीन-चार साल तक लंबित रहता था। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी।

योगी सरकार ने सबसे पहले किसानों को राहत देने का निर्णय लिया

उन्होंने कहा कि 2017 में योगी सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को राहत देने का निर्णय लिया गया। 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का बैंक कर्ज माफ किया गया। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं था, बल्कि किसानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोकना भी था।

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने उत्कृष्ट बीज उपलब्ध कराने, पर्याप्त खाद की व्यवस्था करने और सिंचाई संसाधनों का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया। 20-30 साल पुरानी नहरों को ठीक कराया गया। अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर 30 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा प्रदान की गई। इसके साथ ही 92 हजार से अधिक पीएम कुसुम सोलर पंप लगाए गए। इन पर किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया गया। इससे किसानों को सालभर बिना बिजली के निर्बाध सिंचाई की सुविधा मिली।

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किसानों की आय में इजाफा हुआ है

उन्होंने बताया कि 16 लाख किसानों के नलकूपों के बिजली बिल माफ किए गए। गन्ना किसानों का लंबित भुगतान जारी किया गया। अब तक 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गन्ना मूल्य 300 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति कुंतल किया गया। इससे किसानों की आय में इजाफा हुआ है।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों को पंजीकृत कर 99 हजार 500 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए। यह राशि इतनी है जितना भुगतान समाजवादी पार्टी सरकार के समय एक साल में गन्ना मूल्य के रूप में होता था। 

अलग अलग क्षेत्रों में की गई किसानों की मदद

उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 9 वर्षों में 67 लाख 52 हजार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 5660 करोड़ 33 लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं, इस वर्ष खरीफ सीजन में 5 लाख 39 हजार किसानों को 532 करोड़ 17 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। मार्च के अंत तक सवा दो लाख अतिरिक्त किसानों को 170 करोड़ रुपये और दिए जाने की योजना है।
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कृषि मंत्री ने बताया कि 2017 में प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन 547 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2024-25 में 737 लाख मीट्रिक टन हो गया है। यूपी आज खाद्यान्न उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। इसके अलावा दूध उत्पादन में भी यूपी प्रथम स्थान पर है। आम, गेहूं, धान और गन्ना उत्पादन में भी प्रदेश देश में नंबर-1 है।

कुशीनगर में नया कृषि विश्वविद्यालय बनाया जा रहा

कृषि मंत्री ने आगे बताया कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ाया गया है। ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल के माध्यम से नई तकनीकों को खेत तक पहुंचाया जा रहा है। प्रदेश में 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किए गए हैं। कुशीनगर में नया कृषि विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है, जो प्रदेश का पांचवां राजकीय कृषि विश्वविद्यालय होगा। 

इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा एक और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। बड़े जिलों में अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किए गए हैं। 824 विकास खंडों में से 480 में किसान कल्याण केंद्र बनाए जा रहे हैं। बैतालपुर में स्थापित केंद्र इसका उदाहरण है, जहां किसान प्रशिक्षण, बीज व दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं।
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