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मंजूनाथ हत्याकांड: हत्यारों की उम्रकैद बरकरार

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आईआईएम लखनऊ के पूर्व छात्र मंजूनाथ हत्याकांड के छह अभियुक्तों की उम्र कैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। इन सभी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने नवंबर 2009 में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इसी सजा को बनाए रखा है। इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन में सेल्स मैनेजर मंजूनाथ की हत्या नवंबर 2005 में लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में पेट्रोलपंप मालिक पवन मित्तल ने कर दी थी।
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मंजूनाथ ने मिलावटी पेट्रोल बेचनेवाले माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एनवी रमन्ना की बैंच ने अभियुक्तों द्वारा हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ की गई अपील को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखने का निर्णय दिया है।

इससे पहले 2007 में ट्रायल कोर्ट ने मंजूनाथ की हत्या के मामले अभियुक्त बनाए गए 8 लोगों में से पवन मित्तल को फांसी की सजा और बाकी 7 को उम्रकैद दी थी।

आईआईटी और आईआईएम के कई विद्यार्थी इस फैसले से खुश हुए। आईआईएम में उनके बैचमेट्स ने मिलकर मंजूनाथ शंमुघम ट्रस्ट बनाया और केस लड़ा। अब इस केस के जीतने के बाद आईआईएम के उन छात्र और फैकल्टी में हर्ष है।  
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मंजूनाथ शंमुघम ट्रस्ट से जुड़े आईआईएम लखनऊ के छात्र तरुण यादव, श्रुति, तनुज लोधी और महेश राजा ने इस फैसले को सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला साबित करता है कि जीत सत्य की होती हैं। इन छात्रों ने कहा कि मंजूनाथ ने हमारे लिए काम करने का एक आदर्श मार्ग दिखाया है हमें उसी मार्ग पर चलना चाहिए।

मंजूनाथ शंमुघम ट्रस्ट का निर्माण 23 फरवरी 2006 में हुआ था। इसमें आईआईएम लखनऊ सहित देश भर के आईआईएम संस्थानों के बच्चों और फैकल्टी इस ट्रस्ट से जुड़े थे।
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सजा के खिलाफ की थी अपील

सजा के खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील की जहां दो आरोपियों राजीव अवस्थी और हरीश मिश्रा को रिहा कर दिया गया और पवन मित्तल की फांसी को उम्र कैद में बदल दिया गया।

बाकी पांच आरोपियों देवेश अग्निहोत्री, राकेश आनंद, विवेक शर्मा, शिवेश गिरी और राजेश शर्मा की उम्रकैद को बरकरार रखा गया। इन सभी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन उनकी सजा को बरकरार रखा गया।

मंजूनाथ हत्याकांड : क्या हुआ था

मंजूनाथ आईओसी में बतौर सेल्स मैनेजर नियुक्त थे। उन्होंने पेट्रोल में मिलावट करके बेचने की शिकायत सही मिलने पर लखीमपुर खीरी में दो पेट्रोल पंप तीन महीने के लिए सील करने का आदेश दिया।

उनके आदेश के बाद भी ये पेट्रोलपंप खुले रहे। 19 नवंबर 2005 को मंजूनाथ ने यहां निरीक्षण किया। निरीक्षण में ये पेट्रोल पंप खुले पाए गए। जब मंजूनाथ वहां पहुंचे तो उसी दौरान गोला गोकर्णनाथ के पेट्रोलपंप के मालिक पवन कुमार मित्तल उर्फ मोनू ने छह गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी।

पेट्रोप पंप मालिक के निडर होने का आलम यह था कि उन्होंने मंजूनाथ का शव उन्हीं कार की पिछली सीट पर रखकर सीतापुर जिले में छोड़ आए।

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