अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज 7 साल बाद शुरू हुई। सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर सुनवाई फिलहाल 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी गई है। सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी दस्तावेजों का ट्रांसलेशन नहीं हो पाया है, इसलिए इन्हें पेश नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि 5 दिसंबर के बाद दोनों में से किसी पक्ष को समय नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट में पेश किए गए सभी सबूतों की रिकॉर्डिंग का अनुवाद अगले 10 सप्ताह में कर लें।
बता दें कि पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।
बेंच ने तय किया था कि जहां पर रामलला की मूर्ति है, वहां रामलला को विराजमान कर दें। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को देने के आदेश दिए थे। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिए जाने का आदेश दिया था।