याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त आईएएस एसएन शुक्ला का कहना है कि 2016 के आदेश में ट्रस्टों व सोसायटीज को आवंटित भवनों को अवैध बताते हुए उन्हें खाली कराने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार को हुए फैसले में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटित करने वाले एक्ट को निरस्त किया गया है।
इसमें ट्रस्टों को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। उन्होंने कहा, राज्य सरकार को ट्रस्टों का आवंटन निरस्त करना चाहिए। उन्हें आवंटित मकानों पर हम राज्य सरकार का रुख देखकर ही अगला कदम उठाएंगे।
मामले पर राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति न्याय विभाग को भेजी गई है। अभी न्याय विभाग की राय नहीं मिली है। वह इसका अध्ययन कर कहा है। न्याय विभाग की राय मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।