सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने को कहा है।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि हाईकोर्ट में उनके पक्ष को नहीं सुना गया। इस पर पीठ ने कहा कि हम याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर सकते। पीठ का रुख देखते हुए वकीलों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और रिट याचिका को वापस लेने व हाईकोर्ट में जाने की इजाजत मांगी, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करने का आदेश दिया था। साथ ही 25 मई तक यूपी पंचायत चुनाव संपन्न करने के लिए कहा था। इस व्यवस्था से कई ग्राम पंचायत के समीकरण ही बदल गए हैं। इन याचिकाओं के दाखिल होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल कर कहा था कि पंचायत चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट को किसी तरह का आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। हालांकि शुक्रवार को सुनवाई में यूपी सरकार को अपनी दलीलें पेश करने की नौबत ही नहीं पड़ी।