सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार सुबह उत्तर प्रदेश के नए लोकायुक्त को नियुक्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस संजय मिश्रा को यूपी का नया लोकायुक्त नियुक्त किया है। जस्टिस संजय मिश्रा भी हाइकोर्ट के रिटायर्ड जज हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने संजय मिश्रा को नया लोकायुक्त बनाने के साथ ही लोकायुक्त के लिए पूर्व में दिए गए जस्टिस वीरेन्द्र सिंह का नाम वापस ले लिया है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश के नए लोकायुक्त के चयन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। नाईक ने जारी एक बयान में कहा है कि ‘मैंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हमेशा सम्मान किया है। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तिगण राजन गोगोई तथा पीसी पन्त की खण्डपीठ द्वारा आज न्यायमूर्ति संजय मिश्रा को उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किये जाने के लिये पारित किये गये आदेश का मैं सम्मान करता हूं’।
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर उत्तर प्रदेश सरकार पर लोकायुक्त के लिए सेवानिवृत्त जज वीरेंद्र सिंह का नाम गलत तरीके से अदालत के सामने रखने का आरोप लगाया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इस मामले में अदालत को गुमराह किया गया है। ये याचिका सच्चिनानंद गुप्ता ने दायर की थी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लोकायुक्त के लिए प्रस्तावित पांच नामों की सूची पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनमें से एक वीरेंद्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त करने का आदेश दिया था।
जानें, लोकायुक्त के बारे में
सुप्रीम कोर्ट यूपी के नए लोकायुक्त बनाए गए जस्टिस संजय मिश्रा मूल रूप से इलाहाबाद के निवासी हैं। इनका जन्म 19 नवंबर 1952 में हुआ। ये काफी साफ-सुथरी छवि के हैं। इन्होंने अपना करियर दिसंबर 1977 में शुरू किया था।
18 अगस्त 2005 को जस्टिस संजय मिश्रा पूर्णकालिक जज बने थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 24 सितंबर 2004 को इनकी नियुक्ति हुई। यहां 18 नवंबर 2014 तक इन्होंने अपनी सेवाएं दी। नवंबर 2014 में वह हाईकोर्ट से रिटायर हुए।
जस्टिस संजय मिश्रा बलरामपुर में एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी रह चुके हैं। यूपी सरकार की तरफ से दिए गए पैनल में भी जस्टिस संजय मिश्रा का नाम था। लेकिन, सरकार ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम प्रस्तावित किया था।
इस वजह से जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के नाम पर हुई थी आपत्ति
इस याचिका में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने लोकायुक्त के लिए जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर आपत्ति जताई थी क्योंकि जस्टिस सिंह एक कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार हैं और समाजवादी पार्टी जिला उपाध्यक्ष केबेटे हैं। याचिका में कहा गया है कि लोकायुक्त पद पर जस्टिस सिंह की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
साथ ही याचिका में गुहार की गई थी कि राज्य सरकार केउन अथॉरिटी व अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए जिन्होंने शीर्ष अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है।
गौरतलब है कि महेंद्र कुमार जैन की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने गत 16 तारीख को सेवानिवृत्त जज वीरेंद्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था। अदालती आदेशों की
लगातार हो रही अनदेखी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया था।