प्रदेश के बिजलीघरों के लिए फिर से कोयले का संकट खड़ा होने की आशंका पैदा हो गई है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के बिजली घरों को रोजाना 15-17 रैक कोयले की आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन इस समय 11-12 रैक ही पहुंच पा रहा है। इसके चलते मानसून के दौरान बिजलीघरों में कोयले की भारी कमी हो सकती है, जिससे बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
प्रदेश सरकार के कोयला आयात करने से हाथ खड़े करते ही कोल इंडिया ने यूपी के बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति घटा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद कोयले की आपूर्ति में इजाफा हुआ था, लेकिन इसमें फिर कमी हो गई है। प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के ताप बिजलीघरों में मानक के अनुसार रोजाना 17 रैक कोयले की जरूरत होती है। कम से कम 15 रैक की आपूर्ति तो जरूरी ही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से 11-12 रैक कोयला ही पहुंच पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिजलीघरों में जरूरत से कम कोयला पहुंचने से बरसात के दौरान समस्या खड़ी हो सकती है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एनटीपीसी की उत्पादन इकाइयों के पास कोयले की उपलब्धता सबसे ज्यादा है जबकि राज्यों की उत्पादन इकाइयों को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। यूपी को रोजाना मानक से पांच रैक कम कोयला मिल रहा है। इसके लिए पूरी तरह से ऊर्जा मंत्रालय ही जिम्मेदार है। ऊर्जा मंत्रालय को रेल मंत्रालय से समन्वय करके पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करानी चाहिए।