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Suna Hai Kya: खर्चा-पानी को लेकर मची चखचख, बड़ी कुर्सी के लिए परेशान साहब का किस्सा, पढ़ें- ये कानाफूसी

Thu, 19 Mar 2026 10:08 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

मार्च का महीना खत्म होने में अब सिर्फ 12 दिन ही शेष हैं इसके बावजूद विभागों का बड़ा बजट अभी तक खर्च ही नहीं हुआ है। अधिकारी खर्चा-पानी को लेकर ही चखचख कर रहे हैं। पढ़ें आज की कानाफूसी: 
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और मार्च खत्म होने में अब सिर्फ 12 दिन ही शेष हैं। वहीं, अधिकारी बजट खर्च करने को लेकर ही चखचख कर रहे हैं। वहीं, एक साहब को बड़ी कुर्सी के लिए नवरात्र में पूजा-पाठ करने की सलाह दी गई है। वहीं, माननीय का आशीर्वाद मिलने के बाद एक अफसर उनके लोगों की ही उपेक्षा करने लगे हैं। पढ़ें आज की कानाफूसी: 

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खर्चा-पानी पर चखचख
एक तरफ चुनावी साल में सरकार का सारा जोर योजनाओं के क्रियान्वयन पर है तो दूसरी तरफ मार्च खत्म होने में महज 12 दिन बचे हैं और कई विभागों के पास खर्च करने के लिए हाहाकारी बजट बचा है। कल-कारखानों से जुड़े एक महकमे का भी यही हाल है। पीएम-सीएम की महत्वाकांक्षी योजनाओं के मद में भी पिछले साल कुछ खर्चा नहीं हुआ और इस बार भी कुछ-कुछ खर्चा किया गया। अब विभाग में चखचख मची है कि जिस तरह पिछले साल खर्चा-पानी की लड़ाई में बजट खर्च नहीं हुआ, कहीं इस साल भी अधिकांश बजट रस्साकशी में ही न अटक जाए।

साहब के ग्रह-नक्षत्र ठीक नहीं
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में मई में खाली हो रही कुर्सी को लेकर अपनी-अपनी गोट सेट की जा रही है। वहीं, इस दौड़ में शामिल एक साहब के ग्रह-नक्षत्र इन दिनों सही नहीं चल रहे हैं। विभाग में हाल में एक के बाद एक कोई न कोई ऐसा मामला हो जा रहा है, जिसका साहब से सीधा संबंध न होते हुए भी वह निशाने पर आ जा रहे हैं। ऐसे में साहब खासे परेशान हैं। किसी ने उनको सुझाव दिया कि नवरात्र शुरू होने वाले हैं, थोड़ा पूजा-पाठ कीजिए, नहीं तो कुर्सी बड़ी दूर की कौड़ी होगी।
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माननीय के करीबियों से किनारा
अवध के दो जिलों में इन दिनों दिलचस्प स्थिति है। जिन अफसरों को माननीय का आशीर्वाद मिला, अब वह उनके ही करीबियों और पार्टी के लोगों को नजरअंदाज कर रहे हैं। अफसरों के इस रवैये से माननीय के करीबियों में नाराजगी है लेकिन करें तो क्या करें। वह असहज हैं, न विरोध कर पा रहे, न बात मनवा पा रहे। बेबसी इतनी कि अब वह सिर्फ इन अफसरों के जाने की राह तक रहे हैं। एक अफसर को कमिश्नरेट की कमान है तो दूसरे जिला कप्तान हैं। कप्तान साहब वही हैं जिनकी सलामी रील कुछ महीने पहले वायरल हुई थी।
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