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Suna Hai Kya: खुद ही अपनी पोल खोल रहे अफसर, काउंटर करने में छूट रहे पसीने, मेरी टीम है तो बेटा भी खेलेगा

Thu, 20 Aug 2026 12:05 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी के एक जिले में पुलिस अफसर के परिजन के साथ हुई वारदात में अफसर खुद ही अपनी पोल खोलने लगे हैं। ऐसे में अन्य अफसरों को मुंह छिपाना पड़ रहा है। वहीं, पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में सवालों को काउंटर करने में पसीना आ रहा है। पढ़ें ये किस्से:
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के एक जिले में पुलिस अफसर के परिजन के साथ हुई वारदात में अफसर खुद ही अपनी पोल खोलने लगे हैं। ऐसे में अन्य अफसरों को मुंह छिपाना पड़ रहा है। वहीं, पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में सवालों को काउंटर करने में पसीना आ रहा है। प्रदेश में एक खेल विशेष का आयोजन हो रहा है जिसमें टीम मालिक के बेटे की बड़ी चर्चा है। पढ़ें ये किस्से: 

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नासमझ कप्तान
लखनऊ जोन के एक जिले में बड़ी घटनाओं का खुलासा करते-करते पुलिस अफसर खुद ही अपनी पोल खोल देते हैं। एक अफसर के परिजन के साथ वारदात के बाद अफसरों ने कुछ ऐसी तीरंदाजी शुरू की कि बड़े अफसरों को मुंह छिपाना पड़ा। मामले ने तूल पकड़ा तो अफसर बैकफुट पर आ गए। खैर, यह तो वहां रोज का किस्सा है। कभी बच्चों की हत्या का खुलासा करना खेल समझा गया तो कभी पुलिस की दो टीमों के एक-दूसरे पर पिस्टल तानने की घटना को दबाने में जोर लगा दिया गया। पुलिसिंग का यही हाल रहा तो मामूली घटनाएं भी चुनावी वर्ष में बड़ा मुद्दा बनकर सता सकती हैं।

काउंटर करने में छूट रहे पसीने
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले एक विभाग में आजकल हलचल बढ़ गई है। हलचल हो भी क्यों न, चुनावी आहट के बीच विभाग इन दिनों विपक्षी दलों के निशाने पर है। ऐसे में विभाग ने अपनी सोशल मीडिया टीम को सक्रिय कर दिया है। इस टीम को सोशल मीडिया पर होने वाली नकारात्मक पोस्टों का काउंटर करने की जिम्मेदारी दी गई है। अब हालत यह है कि हर मिनट-दो मिनट में विभाग के खिलाफ कोई न कोई पोस्ट हो रही है। ऐसे में टीम के सदस्यों को काउंटर करने में पसीने छूट रहे हैं। उनके पास कई पोस्टों के जवाब ही नहीं होते।
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मेरी टीम है तो बेटा भी खेलेगा...
प्रदेश में एक खेल विशेष का बड़ा आयोजन इन दिनों सुर्खियों में है। इसमें भाग लेने वाली एक टीम की बात ही निराली है। टीम के मालिक ने पुत्र मोह में गजब का फैसला लेते हुए अपने बेटे को टीम में शामिल करा दिया। न चाहते हुए भी टीम प्रबंधन को बेटे जी को खिलाना पड़ता है। मैच के दौरान बेटे जी की सभी गलतियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, साथी खिलाड़ियों के बीच इस फैसले को लेकर निराशा साफ झलकती है, मगर कोई कुछ कर नहीं सकता। ऐसा लगता है जैसे मालिक महोदय ने सबसे कह रखा हो कि जब टीम मेरी है तो बेटा भी जरूर खेलेगा, नहीं तो मैं टीम से अपनी हिस्सेदारी वापस ले लूंगा।
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