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Suna Hai Kya: निजाम के रंगीनमिजाजी के शौक से सियासी हलकों में हाहाकार, हाफ एनकाउंटर से बढ़ी सियासी सरगर्मियां

Tue, 28 Apr 2026 11:44 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी में भगवा दल के एक नए निजाम पर रंगीनमिजाजी के लगे आरोपों से सियासी हाहाकार मचा हुआ है। वहीं, पूर्वांचल में हुए एक हाफ एनकाउंटर ने सियासी सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। पढ़ें, ये कानाफूसी: 
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- फोटो : AI image
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विस्तार
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यूपी में भगवा दल के एक नए निजाम पर रंगीनमिजाजी के लगे आरोपों ने सियासी हाहाकार मचा हुआ है। महिला की शिकायत के बाद लीपापोती शुरू हो गई है। वहीं, पूर्वांचल में हुए एक हाफ एनकाउंटर ने सियासी सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। पढ़ें, ये कानाफूसी: 

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निजाम को रंगीनमिजाजी का शौक

भगवा दल ने जब से जिलों में नए निजाम तैनात किए हैं, कई पर रंगीनमिजाजी का शुरूर छा गया है। ऐसे ही बुंदेलखंड के एक जिले के पार्टी निजाम बनते ही नेताजी पर एक पूर्व महिला पदाधिकारी के रंगीनमिजाजी का आरोप लगाने से सियासी हलकों में हाहाकार मच गया है। अब महिला की शिकायत पर लीपापोती भी शुरू हो गई है। देखना यह है कि ऊपर बैठे लोगों का न्याय का तराजू किस तरफ झुकता है? उल्लेखनीय है कि भगवा दल में यह नया ट्रेंड चला है। लोग चिंतित हैं कि नारी वंदन का नारा देने वाले दल के नेताओं का नया शौक पार्टी को भारी न पड़ जाए।

पुलिसिंग साफ, पहले हाफ
पूर्वांचल के एक जिले में हुए हाफ एनकाउंटर ने सियासी सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। यूं तो पुलिस हाफ एनकाउंटर करने में आगे है लेकिन इस चक्कर में पुलिसिंग भूलती जा रही है। मामूली मारपीट के मामले की जांच से पहले हुए हाफ एनकाउंटर से नाराज जनप्रतिनिधियों ने आंखें तरेरी और बड़े अफसरों को खरी-खरी सुना डाली। अब कागजों में भले ही इसे सही ठहराने वाली स्याही उड़ेल दी जाए लेकिन पब्लिक सब जानती है। सुना है कि विपक्ष के एक नेताजी ने अपने सजातीय के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद पहले फर्जी मुकदमा कराया और फिर जांबाज पुलिसवालों से यह फर्जी ऑपरेशन भी करा दिया। सत्ता पक्ष वाले यह सोचकर हैरान हैं कि जिले की पुलिस किसकी तरफ है?
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सौदेबाजी पर लगेगी लगाम
स्थानीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार इस जुगत में रहते हैं कि विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनको लेकर कुछ न कुछ बोलते रहें। विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी उनकी इस रणनीति को अच्छी तरह से भांप चुके हैं। उन्होंने अपनी सेकेंड लाइन को भी हिदायत दे रखी है कि स्थानीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बारे में कुछ न कहें। दरअसल जैसे ही स्थानीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर कुछ बोला जाता है, सत्ता पक्ष के बीच उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ जाती है। विपक्षी पार्टी ने सौदेबाजी की इसी क्षमता पर लगाम लगाने की तैयारी की है।
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