जब से सोने की खरीद न करने का एलान किया गया है कई धन्नासेठों के होश खराब हो गए हैं। पहले जो रौब झाड़ते थे वो अब भले ही खुलकर अपनी बात न कह रहे हों लेकिन बंद कमरे में दुखड़ा रो रहे हैं। वहीं, सेहत महकमे और पढ़ाई-लिखाई के महकमे में अलग ही कहानी चल रही है। पढ़ें, ये कानाफूसी:
दिल में कमल... जेब पर भारी
पीली धातु की खरीद कम करने के एलान से उस तबके का दिल टुकड़े-टुकड़े हो गया जो कमल का फूल बगल में रखकर सोता था। एक बड़े धन्नासेठ अपनी डीपी में नेताओं के साथ खिलखिलाने वाली फोटो लगाकर रौब झाड़ते थे। अब बिल्डर बन चुके यह धन्नासेठ अचानक सन्नाटे में आ गए हैं। वह इस एलान का खुलकर विरोध तो नहीं कर पा रहे हैं लेकिन बंद कमरे में जमकर दिल का गुबार निकाल रहे हैं। उनकी पहुंच को देखते हुए प्रदेशभर के छोटे-बड़े व्यापारी दे दनादन मोबाइल पर घंटी मार रहे हैं लेकिन सेठजी खुद ही सदमे में हैं। वह फोन एयरप्लेन मोड पर डालकर गम हल्का कर रहे हैं।
सियासत भारी या अर्थ
सेहत महकमे में इस दिनों हलचल चल रही है। यह हलचल संभावित बदलाव को लेकर है। यह बदलाव उस यूनिट में होना है जो कभी घोटाले के लिए मशहूर रही है। अब यूनिट में एक कुर्सी के लिए कई दावेदार हो गए हैं। ये दावेदार आपस में जोर आजमाइश कर रहे हैं। कोई सियासी ताकत लगा रहा है तो कोई आर्थिक। अब देखना यह है कि सियासत भारी पड़ती है या अर्थ।
अधिकारियों का नया ठिकाना
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के अधिकारियों को इन दिनों बड़ी राहत मिली है। पूर्व में बड़े साहब ने आते ही इतनी सख्ती कर दी कि विभाग के अधिकारी सचिवालय जाने में भी डरने लगे थे। कई लखनऊ का मोह छोड़कर अपनी मूल तैनाती वाले स्थल में बैठने लगे हैं लेकिन हाल ही में नंबर दो पर हुई तैनाती ने उनको नया ठिकाना दिया है। चर्चा है कि विभाग में बड़े साहब के यहां नंबर न लगा पाने वाले अधिकारी नंबर दो के यहां पहुंचने लगे हैं। अब यह बात अलग है कि उनकी यहां कितने दिन दाल गलती है?
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