यूपी के एक अधिकारी अपने छपास रोग के कारण संकट में पड़ गए। कैलेंडर कांड ने उनके सपने चूर-चूर कर दिए हैं। वहीं, एक प्रतिशत कमीशन के आदेश ने खलबली मचा दी है तो जमीन के शौकीन माननीय कोडीन सिरप कांड के बाद फिर सुर्खियों में आ गए हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
कैलेंडर ने काटा पत्ता
नोएडा में एक अफसर छपास रोग का शिकार हो गए। कैलेंडर में उनकी फोटो क्या छपी, नियुक्ति विभाग में उन्हें किनारे लगाने की फाइल दौड़ पड़ी। हालांकि इस खेल में वह अकेले नहीं थे। उनके साहब भी मुस्कराते हुए कैलेंडर का विमोचन कर रहे थे। अपनी गिटार बजाती फोटो देख मंद-मंद मुस्करा भी रहे थे। शासन की फटकार के बाद खुद को पाक-साफ बताने लगे लेकिन कैलेंडर ने उनका सपना चकनाचूर कर दिया है। सुना है कि जल्द ही उन पर भी गाज गिर सकती है। कम से कम साल भर तक कैलेंडर में अपनी फोटो निहारते हुए वक्त बिताना पड़ सकता है।
कमीशन का संदेश
सभी खंडों को संदेश गया कि विशेष कामों पर 3 प्रतिशत और एक करोड़ से ऊपर के कामों पर 1 प्रतिशत कमीशन काटकर ऊपर भेजा जाए। नीचे तक गया ये संदेश जब ऊपर पहुंचा तो ऊपर वाले हैरान-परेशान कि आखिर यह संदेश भेजा किसने। अब संदेश भेजने वाले के बारे में डिटेल जुटाई जा रही है कि चुनावी वर्ष में क्वालिटी के साथ समझौता करने वाला यह संदेश चलाने के पीछे की मंशा क्या है? नतीजा जो हो लेकिन खलबली मची हुई है।
गले की हड्डी बनी जमीन
कोडीन सिरप कांड में सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व माननीय अब एक नए जमीन विवाद में उलझ गए हैं। वैसे भी जमीन के विवाद निपटाना माननीय का पुराना शौक है। ताजा मामला राजधानी से सटे ग्रामीण इलाके में सड़क की आबादी वाली जमीन का है। माननीय ने पहले तो किसी से इस जमीन की रजिस्ट्री करा ली। जब रजिस्ट्री करने वाला पैसा मांगने लगा तो माननीय बिफर गए कि यह जमीन तो आबादी की है तो पैसा किस बात का। बाद में पता चला कि वह जमीन वास्तव में आबादी की है और माननीय ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराके उस पर दुकान बनवा ली है। अब देखना यह है कि इस मामले में सरकारी अमला क्या रुख अपनाता है।
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