यूपी के एक महकमे में मातहतों को दिवाली पर खास गिफ्ट देने के लिए कहा गया है। उन्हें मिठाई या ड्राईफ्रूट की जगह सोने के सिक्के लाने का फरमान दिया गया है। वहीं, एक साहब बड़े परेशान हैं। उनके पहले तैनात रहे अधिकारी ने जमकर रायता फैलाया है और अब समेटने की जिम्मेदारी उनकी है। वहीं, एक नौकरशाह जमकर पैसा बनाने के बाद अब राजनीति में आने की तैयारी में हैं। पढ़ें ये अनकहे किस्से:
सिक्के के शौकीन साहब
सूबे के खजाने में बड़ा योगदान देने वाले महकमे के कर्मचारियों की टेबल पर इस दिवाली सोना बरसने वाला है। इसकी व्यवस्था महकमे के ही एक नायब साहब ने की है। बड़े साहब समेत सभी कर्मियों के नाम पर नायब साहब ने फील्ड में तैनात मातहतों को तोहफे के तौर पर फल, ड्राईफ्रूट और मिठाई के बजाय 10-10 ग्राम के सोने के सिक्के लाने का फरमान सुनाया है। मंशा है कि हर कोई तोहफा पाकर गदगद हो जाए। इसलिए इस बार सड़कों पर जांच-पड़ताल करने वाले हर विंग को कम से कम दो-दो सिक्के देने का आदेश दिया गया है। खुशी से कोई इससे अधिक भी दे सकता है।
करे कोई, भरे कोई
एक कमिश्नरेट के बड़े साहब इन दिनों काफी परेशान हैं। इसकी वजह उनसे पहले इस कुर्सी पर रहे साहब हैं। पुराने साहब ने कई ऐसे काम और कार्रवाइयां की थीं, जो कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। लिहाजा, कई मामले अदालत पहुंच गए हैं। अदालतें भी सख्त रुख अपना रही हैं। ऐसे में मौजूदा साहब को बार-बार तलब होकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है। वह परेशान हैं कि करे कोई और भरे कोई। इससे छुटकारा पाने का रास्ता तलाश रहे हैं। फिलहाल तो पुराने साहब का फैलाया रायता इन्हें ही समेटना पड़ेगा।
नौकरशाह की महत्वाकांक्षा
एक नौकरशाह चुनाव से पहले सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बेहिसाब पैसा कमाया है, इसलिए खर्च करने के तरीके तलाश रहे हैं। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी कुलबुला रही हैं। वह जुगत में हैं कि किसी तरह विपक्ष के नेताजी टिकट दे दें। उनके नजदीकी ठेकेदार इसके लिए दमदार पैरवी भी कर रहे हैं। नौकरशाह ने बिना लिए-दिए किसी का भला नहीं किया। अब उन्हें कौन समझाए कि धन के दम पर सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन लोकतंत्र के इस उत्सव में सिर्फ पैसे के बल पर जीत हासिल करना आसान नहीं है।
आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाट्सएप करें।