चीनी एवं गन्ना आयुक्त मनीष चौहान ने मिलों को 31 अगस्त तक किसानों का 8254.76 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सहकारी गन्ना विकास समितियों को गन्ना अंशदान भी तत्काल देने को कहा है। वे बुधवार को अपने कार्यालय में सभी निजी चीनी मिल समूहों के ग्रुप हेड व एकल इकाइयों के महाप्रबंधक व यूनिट हेड के साथ मिलवार गन्ना मूल्य भुगतान की समीक्षा कर रहे थे।
पेराई सत्र 2018-19 में मिलों ने 33046.76 करोड़ के गन्ना खरीद के सापेक्ष अभी तक 24792 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। इस तरह मिलों पर 8254.76 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें बजाज, मोदी और सिंभावली जैसे समूह बड़े बकायेदार के तौर पर शामिल हैं। निजी मिलों पर लगभग 7800 करोड़ गन्ना मूल्य अवशेष है। शेष गन्ना मूल्य सहकारी व चीनी निगम की मिलों पर बकाया है।
आयुक्त ने मिलों की रिपेयरिंग तथा मेंटेनेंस के कार्यों की समीक्षा के दौरान आगामी सत्र में समय से मिलों का संचालन शुरू करने को कहा है। उन्होंने गन्ने की खास प्रजाति का रकबा 40 फीसदी से अधिक होने पर चिंता जताई।
आयुक्त ने कहा कि गन्ना प्रजातियों का संतुलन इस प्रकार रखा जाए कि एक प्रजाति के गन्ना का सर्वेक्षण 40 प्रतिशत से अधिक न हो। अगैती एवं सामान्य प्रजातियों के क्षेत्रफल में भी संतुलन बनाया जाए। पारदर्शिता के लिए किसानों को उनके गन्ना क्षेत्रफल की जानकारी एसएमएस से देने के साथ ही हार्डकॉपी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मिलों को गन्ना अंशदान का भुगतान तुरंत समितियों को करने को कहा है।