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पढ़िए, चाट और पान बेचने वालों के बच्चों की सक्सेस स्टोरी

Mon, 18 May 2015 12:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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मुश्किलें वो चीज हैं, जो हमें तब दिखाई देती हैं, जब हमारा ध्यान लक्ष्य पर नहीं होता है। अभावों में पले बढ़े कुछ स्टूडेंट्स ने हेनरी फोर्ड के इस कथन को सत्य कर दिखाया है। ये वो स्टूडेंट्स है, जिनमें से किसी के पास फीस भरने को पैसे नहीं थे, तो किसी की झोपड़ी में बिजली नहीं थी। इनके पास था तो कुछ कर गुजरने का जज्बा। इसी जज्बे और लगन के बलबूते अभावों में जी रहे इन स्टूडेंट्स ने अपने और अपने पेरेंट्स के सपनों को उड़ान दी है।
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कानपुर के विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले अभिषेक वर्मा को हाईस्कूल में 87.83 प्रतिशत अंक मिले। लाल बंगला में चाट-बतासा का ठेला लगाकर परिवार का पालन पोषण करने वाले कैलाश वर्मा के बेटे अभिषेक ने हरजेंदर नगर स्थित विद्या निकेतन इंटर कॉलेज से 87.83 फीसदी अंक पाए हैं। अभिषेक ने बताया कि पिता की दिनरात की मेहनत को देखकर ही उसने भी कड़ी मेहनत की। इसी का नतीजा रहा कि उसने आज यह मुकाम पाया है। उसके दिमाग में कहीं न कहीं यह सोच जरूर रही होगी कि उसे इन स्थितियों से उबरना है।

स्ट्रीट लाइट में पढ़कर गिरेश ने पाया मुकाम

90.4 प्रतिशत अंक पाने वाले गिरेश कनौजिया की ही कहानी ले लीजिए। ऑक्सफोर्ड मॉडल इंटर कॉलेज, श्याम नगर में पढ़ने वाले गिरेश के पिता संजय कनौजिया श्याम नगर के पॉश इलाके में बनी रक्षा विहार कालोनी के बाहर झोपड़ी बनाकर कपड़े प्रेस करते हैं। इस गरीब की झोपड़ी में बिजली का कनेक्शन नहीं है। हां, शिक्षा की रोशनी जरूर संजय के छोटे बेटे गिरेश के रूप में टिमटिमा रही थी।

पढ़ाई के प्रति बेटे की लगन को देखते हुए ही संजय ने बेटे का श्यामनगर स्थित ऑक्सफोर्ड मॉडल स्कूल में दाखिला करा दिया। गिरेश ने नगर निगम की स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करके इंटरमीडिएट परीक्षा में 90.4 फीसदी अंक हासिल किए। माता-पिता ने यह खुशखबरी सुनी तो उन्होंने उसे गले से लगा लिया। अमर उजाला टीम जब उसके घर पहुंची तो पिता संजय कपड़ों में प्रेस कर रहे थे।

इंटरमीडिएट में 88.2 प्रतिशत अंक पाने वाली कीर्ति गुप्ता कानपुर के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, एनटूरोड में पढ़ती हैं। कीर्ति गुप्ता के पिता राम सजीवन की पान की दुकान है। अभाव में पढ़ाई करने के बाद भी कीर्ति ने 12वीं में 88.2 प्रतिशत हासिल किए हैं। कीर्ति ने बताया कि संसाधनों के अभावों को उसने अपनी लगन पर हावी नहीं होने दिया। कई बार तो फीस समय पर जमा नहीं हो पाती थी। कीर्ति आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहती है।

88.8 फीसदी अंक हासिल करने वाले लखनऊ अवध कॉलेजिएट स्कूल के छात्र अवनीश मिश्रा के पिता शिव बाबा पल्लेदारी करते हैं। इसी से परिवार का खर्च चलता है। दो जून की रोटी का जुगाड़ होता है। अभावों में पले अवनीश की तमन्ना है कि वह इंजीनियर बने। अपने सपने के लिए दिन-रात एक किया।

इंटरमीडिएट में 88.8 फीसदी अंक हासिल किए। अवनीश कहता है, घर की खराब आर्थिक हालत ने मुझे कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। सब्जी बेचने वाले के बेटे ने पाए 88 फीसदी अवध कॉलेजिएट के ही छात्र अंशुल कुमार कुशवाहा ने इंटर में 88 फीसदी अंक हासिल किए। उसका परिवार खुश है। अंशुल के पिता राम नरेश कुशवाहा सब्जी बेचते हैं। पर बेटे को सिविल सर्विसेज में भेजना चाहते हैं। अंकुश ने भी उनकी तमन्ना को पर लगा दिए। परिवार को उम्मीद बंधी है कि  बेटा नाम करेगा। घर की हालतसुधरेगी।

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मां धोती है दूसरे के घर के बर्तन

महात्मा बुद्ध मेमोरियल इंटर कॉलेज की छात्रा राधा गौतम की मां राम दुलारी घरों में बर्तन मांजती हैं। मां बाहर काम करती है तो राधा पूरा घर संभालती है। साथ ही पढ़ाई भी करती है। राधा ने इस सबके बावजूद इंटरमीडिएट में 80.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। वह टीचर बनना चाहती है। उसका कहना है इससे वह ऐसे बच्चों की मदद कर सकेगी जो अभावों के बावजूद कुछ करने की ललक रखते हैं।

छोटी सी किराने की दुकान में सजे बड़े सपने बाल गाइड इंटर कॉलेज गोसाईंगंज का छात्र चंद्रसेन इंजीनियर बनना चाहते हैं। चंद्रसेन ने 12वीं में 90.83 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। चंद्रसेन के पिता की छोटी सी किराने की दुकान है। चंद्रसेन के अनुसार खराब आर्थिक हालत उसकेलिए मायने नहीं रखती। मेरे पास सपने हैं। मुझे उन्हें ही पूरा करना है।

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