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Lucknow News: आईवीएफ की सफलता अमेरिका में 39 और यहां दावा 80 फीसदी का

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प्रमाणपत्र देती केजीएमयू की कुलपति।
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लखनऊ। एम्स नई दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीना मल्होत्रा के मुताबिक कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के झूठ पर रोक लगाने की मांग की है। उनके मुताबिक अमेरिका में किसी आईवीएफ की अधिकतम सफलता दर 39 फीसदी है। भारत में तमाम आईवीएफ 80 फीसदी सफलता का दावा कर रहे हैं। वे शुक्रवार को क्वीन मेरी अस्पताल के स्थापना दिवस समारोह 92वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहीं थीं।
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प्रो. नीना मल्होत्रा ने कहा, सरकारी संस्थानों में आईवीएफ सेंटर खोलने के साथ चलाए जाने भी जरूरी हैं। इसके बाद ही निजी केंद्रों के झूठ पर रोक लग सकती है। उनके मुताबिक शादी की उम्र में देरी की वजह से ही बांझपन की समस्या बढ़ रही है। आईवीएफ सेंटर के माध्यम से गर्भधारण का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन अभी भी अमेरिका जैसे देश के मुकाबले हम काफी पीछे हैं। सरकारी संस्थान में आईवीएफ की व्यवस्था होने पर इस तरह के दावों पर रोक लग जाएगी। इससे पहले केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कल्याणी दास ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने विभागीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मौके पर प्रो. सुजाता देव, प्रो. सीमा मेहरोत्रा और विभाग की अन्य डॉक्टर मौजूद रहीं।



क्वीन मेरी में हर साल नौ हजार प्रसव

क्वीन मेरी की विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने बताया कि हर साल विभाग में नौ हजार प्रसव होते हैं। किसी एक संस्थान में होने वाले प्रसव की यह सर्वाधिक संख्या है। इनमें से काफी प्रसव ऑपरेशन के माध्यम से होते हैं।
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इन्हें मिला पुरस्कार

सर्वाधिक मानवीय रेजिडेंट- डॉ. मोनिका सिंह (जूनियर रेजिडेंट)
सर्वाधिक उपस्थिति- डॉ. शालिनी यादव, डॉ. आरती वर्मा और डॉ. शांभवी झा
स्टाफ- अविलेश कुमार (फार्मासिस्ट), राघवेंद्र उपाध्याय (कंप्यूटर ऑपरेटर), पुष्पा देवी (कार्यालय स्टाफ), मनोज कन्नौजिया (ओटी स्टाफ), मंजू (परिवार नियोजन विंग)।



क्वीन मेरी में शुरू हो चुकी है आईवीएफ की सुविधा

केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) में भी आईवीएफ की सुविधा शुरू हो चुकी है। इसी साल आईवीएफ के माध्यम से एक महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जा रहा है।
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