लखनऊ। हैदराबाद के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के संस्थापक अध्यक्ष पद्म विभूषण डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी के मुताबिक रुपये कमाना या पद हासिल करना सफलता नहीं है। किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही सफलता है। डॉ. रेड्डी मंगलवार को संजय गांधी पीजीआई के 29वें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत भाषण दे रहे थे।
पद्श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे तीनों सम्मान पाने वाले देश के पहले डॉक्टर डी. नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि दीक्षांत दिवस उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों के बारे में होता है। यह आपकी विजय का दिन है, आपके बदलाव का दिन है। पुरानी बातें याद करते हुए डॉ. रेड्डी ने कहा कि अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब मैं लौटकर आया तो चिकित्सीय एंडोस्कोपी को पेशा बना लिया और आर्थिक रूप से काफी सफल हो गया।
एक दिन मेरे पिताजी ने कहा कि तुम भले इतना पैसा कमा रहे हो, लेकिन मैं तुम्हें सफल नहीं मानता। तुमने समाज के लिए कुछ नहीं किया है। न किसी को पढ़ाया और न ही शोध किया। इस घटना ने मुझे एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के निर्माण की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया। यह काम आसान नहीं था। संसाधन कम थे। संयोग से एक दिन मुझे दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी का इलाज करने के लिए बुलाया गया। उन्होंने हमें एक भवन प्राप्त करने में मदद की और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी को पूरी तरह से समर्पित 200 बेड वाला पहला अस्पताल बन गया।
दीक्षांत में 415 विद्यार्थियों को डिग्री और 17 को पदक दिए गए। अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन, डीन प्रो. शालीन कुमार, रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेयी भी मौजूद रहे।
एसजीपीजीआई का स्थापना दिवस।
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