पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की।
उन्होंने मेरठ में 1987 में हुए हाशिमपुरा कांड के सिलसिले में मुख्यमंत्री को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस सौंपा।
भाजपा सांसद लालजी टंडन के आवास पर स्वामी ने कुछ पत्रकारों को बताया कि हाशिमपुरा कांड में पीएसी व पुलिस वालों पर एक वर्ग विशेष के लोगों को मार डालने का आरोप लगा था।
इसको लेकर उन्होंने दिल्ली की एक स्थानीय अदालत में मुकदमा दायर किया था। यह मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि वह (स्वामी) चाहें तो न्यायालय का नोटिस वह खुद उत्तर प्रदेश सरकार को उपलब्ध करा सकते हैं। उसी सिलसिले में वे मुख्यमंत्री से मिले।
स्वामी ने तर्क दिया कि पुलिस या पीएसी के जवानों ने कोई कार्रवाई स्वत: तो की नहीं होगी। जिस समय यह घटना घटी उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। चिदंबरम केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे।
घटना वाले दिन वे उत्तर प्रदेश में ही थे। पूरे मामले में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है। इसलिए प्रदेश सरकार की तरफ से भी पूरे प्रकरण पर तथ्य सामने आने चाहिए।