इस पर परिवारीजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़ा तो चादर के सहारे धर्मेंद्र का शव लटकता देख हड़कंप मच गया। परिवारीजन रोने-पीटने लगे। सूचना पाकर गोरखपुर में सिपाही के पद पर तैनात छोटा भाई राहुल समेत अन्य परिवारीजन लखनऊ पहुंच गए। राहुल ने बताया कि उसकी मां व धर्मेंद्र की पत्नी नीतू की तबीयत ठीक नहीं है।
नीतू उपचार के लिए ही अपनी बहन के घर पर आई थी। हाल ही में उसका ऑपरेशन हुआ था। धर्मेंद्र मां व पत्नी की देखभाल के लिए घर के आसपास के जनपद में ही तैनाती चाहता था। उसने पीएसी के अधिकारियों को मिर्जापुर, बाराबंकी, वाराणसी, आजमगढ़, सोनभद्र में से एक जगह भेजने के लिए प्रार्थनापत्र भी दिए थे।
राहुल का कहना है कि कई बार उसने पीएसी मुख्यालय महानगर जाकर एडीजी व आईजी से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुलाकात नहीं की। राहुल ने बताया कि शायद सिस्टम व अधिकारियों से परेशान धर्मेंद्र को कोई और रास्ता नहीं दिख रहा था। इसलिए उसने जान दे दी। इंस्पेक्टर ने भी तबादले और पारिवारिक वजहों से परेशान होकर खुदकुशी करने की आशंका जताई है।