लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग में परास्नातक के विद्यार्थी आगामी सत्र से जैव विविधता एवं वन्यजीव प्रबंधन के बारे में भी अध्ययन कर पाएंगे। इसके लिए विभाग ने कोर्स में नया पेपर शामिल किया है। इसे विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) की बैठक से मंजूरी भी मिल गई है। अब फैकल्टी बोर्ड और एकेडमिक काउंसिल से पास होना शेष है।
विभागाध्यक्ष प्रो. एम सेराजुद्दीन ने बताया कि बीओएस की बैठक में एक वर्षीय परास्नातक के कोर्स को अनुमोदन देने के साथ ही दो वर्षीय परास्नातक कोर्स के पुनर्गठन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। सत्र 2025-26 से इन कोर्स की पढ़ाई शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि अब से विद्यार्थी चार वर्षीय स्नातक (बीएससी) के सातवें सेमेस्टर में छह विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर पाएंगे। अभी तक यह प्राविधान एमएससी कोर्स में ही था। विद्यार्थी विषम सेमेस्टर में एक थ्योरी पेपर पढ़ने के साथ ही प्रयोगात्मक परीक्षा भी देंगे। जिन छह विषयों (इलेक्टिव पेपर) में विशेषज्ञता शुरू करने पर विचार कर निर्णय लिया गया है, उनमें मत्स्य विज्ञान और प्रबंधन, कीट विज्ञान, परजीवी अध्ययन, मॉलीकुलर विज्ञान, एंडोक्रिनोलॉजी एवं प्रजनन विज्ञान व वन्यजीव प्रबंधन विज्ञान शामिल है। विद्यार्थी विशेषज्ञता अध्ययन के लिए इनमें से किसी भी एक विषय का चुनाव कर सकते हैं। यह उनके लिए स्वरोजगार में भी मददगार होगा।
शैक्षिक भ्रमण से लौटे छात्र
प्राणी विज्ञान विभाग के छात्रों का दल नौ दिवसीय शैक्षिक टूर सफलतापूर्वक पूरा कर बुधवार को विश्वविद्यालय लौट आया। ओडिशा और वेस्ट बंगाल गए विद्यार्थियों ने वहां तमाम रोमांचक गतिविधियां देखने के साथ ही उनका अध्ययन किया। छात्रों ने ओडिशा के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर में ऑर्गेनिक मछली पालन सीखा। नंदन कानन प्राणी उद्यान भुवनेश्वर में जंगल सफारी और कोणार्क सूर्य मंदिर के इतिहास को जानने के साथ लिंगराज महादेव मंदिर में दर्शन भी किया। उन्होंने सुंदरवन के डेल्टा की भी जानकारी प्राप्त की।