प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सभी विषयों की वर्क बुक अब अगले साल ही बच्चों को मिल पाएंगी।
सामाजिक विज्ञान की वर्क बुक का नमूना तैयार है लेकिन इनकी छपाई के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास पैसा नहीं है।
इसके लिए शासन ने अभी धनराशि जारी नहीं की है। अन्य विषयों की वर्क बुक अभी तैयार की जा रही हैं। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें तो मुफ्त दी ही जाती हैं।
स्कूल में ही बच्चों को पढ़ाई का अभ्यास कराने के लिए दो साल पहले वर्क बुक भी देने की शुरुआत की गई।
इसकी पहल इसलिए की गई थी ताकि निजी स्कूलों के मुकाबले ये बच्चे भी गुणवत्तापरक शिक्षा पा सकें। अभी तक पांचवीं तक के बच्चों को सिर्फ गणित और भाषा की वर्क बुक दी जा रही थीं।
बस्ते का बोझ भी न बढ़े इसलिए वर्क बुक उन्हें घर नहीं ले जानी होतीं। स्कूल में ही शिक्षकों को इनमें अभ्यास कराना होता है।
अन्य विषयों की वर्क बुक भी तैयार की जा रही हैं। सामाजिक विज्ञान की वर्क बुक तो इस साल तैयार भी हो गई हैं।
सभी बच्चों को बांटने के लिए छपाई की धनराशि शासन से अभी जारी नहीं हुई है।
बेसिक शिक्षा निदेशालय ने वर्क बुक तैयार होने और इनकी छपाई के लिए की धनराशि न होने की जानकारी शासन को दे दी है।
ऐसी स्थिति में गणित और भाषा की वर्क बुक इस साल बच्चों को मिल पाना मुश्किल है।
इसकी वजह है कि शासन से धनराशि जारी भी हो जाती है तो छपाई के लिए टेंडर और फिर छपकर आने से लेकर वितरण तक लम्बी प्रक्रिया करनी होगी।
ऐसे में अगले साल ही बच्चों को ये मिल पाएंगी। वहीं विज्ञान की तो अभी वर्क बुक तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।