फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्टेशनरी की दुकान से व्हाइटनर खरीदकर झाड़ियों में नशा कर रहे थे विद्यार्थी

Thu, 21 Feb 2019 11:11 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
व्हाइटनर जब्त किए गए - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सावधान, छोटी उम्र में ही स्कूली छात्र नशे के आदी हो रहे हैं। ये व्हाइटनर के जरिए अपने को नशे में चूर कर रहे हैं। एक शिकायत पर गुरुवार को पुलिस ने आर्मी ग्रास फॉर्म पर छापा मारा तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। वहां पर स्कूली छात्र नशा करते मिले। पुलिस को देख कई छात्र भाग गए मगर एक धरा गया। हैरानी की बात यह है कि ये सब किशोर थे और ये सीतापुर के नामीगिरानी स्कूल में पढ़ते हैं। पूछताछ में पता चला कि वह एक दुकान से रोजाना व्हाइटनर खरीदते हैं। बाद में आर्मी ग्रास फार्म में बैठकर नशा करते हैं। पुलिस ने दुकान पर छापेमारी कर व्हाइटनर की सैकड़ों शीशी जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
विज्ञापन


शहर कोतवाली इलाके के महेशपुर चिलवारा निवासी एक व्यक्ति ने सीओ सदर से गुपचुप तरीके से शिकायत की थी कि उसका बेटा व्हाइटनर का नशा करता है। उसके कई साथी व अन्य स्कूलों के बच्चे इस नशे का रोजाना सेवन कर रहे है। स्कूल से वापस आते समय आर्मी ग्रास फॉर्म पर मौजूद रहते हैं। इस पर सीओ सिटी योगेद्र सिंह ने गुरुवार को आर्मी ग्रास फॉर्म पर छापा मारा तो यहां पर कई विद्यार्थी व्हाइटनर के नशे में चूर मिले। लेकिन पुलिस को देखते ही अपनी साइकिल छोड़कर भाग निकले। एक विद्यार्थी पुलिस की पकड़ में आ गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर पूरे मामले की पोल खुल गई। उसने पुलिस को बताया कि वह शहर की एक दुकान से व्हाइटनर खरीदता है।

बाद में आर्मी ग्रास फार्म में बैठकर इत्मिनान से उसका नशा करते हैं। पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने दुकान पर छापा मारा तो यहां पर व्हाइटनर की सैकड़ों शीशियां मिलीं। पुलिस ने इन सभी को जब्त कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आर्मी ग्रास फॉर्म पर सभी विद्यार्थी ही थे, जिनकी उम्र 18 बरस से कम है। यह सब शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों के बच्चे हैं। यह स्कूल से वापस आते समय नशा करते थे। उसके बाद यह अपने घर जाते थे। इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया।
विज्ञापन

कैसे करते थे नशा

यह युवा कोई शराब व बीयर तो नहीं पीते थे, लेकिन अपने आपको इससे अधिक नशे में रखते थे। पुलिस का कहना है कि यह लोग एक रुमाल पर व्हाइटनर डालते थे। उसके बाद इसे काफी देर तक सूंघते थे। इससे इनको नशा हो जाता था। इस नशे की खासियत यह है कि इसमें मुंह से कोई बदबू नहीं आती थी। इससे बच्चों के घरवाले भी नहीं जान पाते थे।

पढ़े-लिखे युवा हो रहे आकर्षित
व्हाइटनर का इस्तेमाल कोई अनपढ़ नहीं कर रहा है। बल्कि सब पढ़े-लिखे युवा ही कर रहे हैं। कोई हाईस्कूल का विद्यार्थी है तो कोई इंटर में पढ़ रहा है। यह व्हाइटनर आसानी से मिल जाता है। इसकी बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह काफी सस्ता रहता है। जब विद्यार्थी इसको खरीदते हैं तो किसी की नजर इन पर पड़ती भी नहीं है। लोग समझते हैं कि वह अपनी पढ़ाई में इसे इस्तेमाल करेगा।

40 रुपये में बिक रही प्रति शीशी
पुलिस ने बच्चे की शिनाख्त के आधार पर ग्रीकगंज स्थित एक स्टेशनरी की दुकान पर छापा मारा तो यहां पर सैकड़ों व्हाइटनर मिले। यह प्रति शीशी 40 रुपये में बेची जा रही थी। विद्यार्थी ने बताया कि रोजाना यहां से सैकड़ों विद्यार्थी व्हाइटनर खरीदते हैं। वह इस्तेमाल करके वहीं पर फेंक देते हैं। वहीं दुकानदार भी मुनाफा कमाने के चक्कर में विद्यार्थियों से यह कभी जानने की कोशिश नहीं की, आखिर रोजाना कहां ले जाते हो। पुलिस व्यापारी की मिलीभगत मानकर पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।

काफी समय से चल रहा धंधा

व्हाइटनर के नशे का कारोबार काफी समय से चल रहा है। अभी तक लोग व्हाइटनर के बारे में चर्चा करते थे। जब यह पूरा मामला खुला तो पता चला कि स्कूली बच्चे काफी समय से ग्रास फॉर्म पर आते हैं। यहां पर खेलने के बहाने आते हैं। झाड़ियों में बैठकर नशा करते हैं। किसी की निगाह इन पर जाती भी नहीं थी। क्योंकि यह इलाका सुनसान रहता है। अगर कोई निकलता भी है तो वह सीधे फर्राटा भरता हुआ चला जाता है। इसी वजह से यह झाड़ियां विद्यार्थियों के लिए मुफीद हैं।

दुकानदार को सिफारिश में पहुंचे भाजपा नेता
जिस समय दुकान पर छापेमारी हो रही थी। उस समय भाजपाई व अन्य कई नेता वहां पहुंच गए। वह दुकानदार के पक्ष में बोलने लगे। पुलिसिया कार्रवाई न करने की सीओ से बात कही। लेकिन मीडिया के कैमरे चमकते ही वह चुप हो गए। पुलिस ने उनकी एक न सुनी, सीधे व्हाइटनर जब्त करके कार्रवाई शुरू कर दी।

निर्धारित नहीं हो सका एक्ट
व्हाइटनर मिलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले अभिहित अधिकारी अरविंद कुमार यादव को जानकारी दी। जिस पर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार को भेजा। लेकिन उन्होंने इसे फूड एक्ट का मामला न बताकर किनारा कर लिया। इसके बाद इसे औषधि एक्ट का मामला बताया गया। जिला औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने कोतवाली पहुंचकर जांच की। इन्होंने भी इसे औषधि एक्ट से बाहर बताया। अब पुलिस ही तय करेगी आखिर यह किस एक्ट में आता है। मामले की जांच चल रही है।
विज्ञापन

लीवर, फेफड़ों व किडनी को होता नुकसान

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह ने बताया कि व्हाइटनर में केमिकल मिले होते हैं। इसके सेवन से लीवर व फेफड़ों पर असर पड़ता है। लगातार सेवन से किडनी को भी नुकसान हो सकता है। नियमित इसके सेवन से लोग नशे के आदी हो जाते हैं। इससे उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगता है।

नाबालिग को नहीं बेचा जा सकता व्हाइटनर
जिला औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने बताया कि इस व्हाइटनर पर लिखा है कि इसे नाबालिग को नहीं बेजा जा सकता है। 18 वर्ष से कम आयु के लोगों को बेचना अपराध है। जबकि व्यापारी धड़ल्ले से नाबालिग को ही इसे बेच रहा था। नवीन कुमार ने बताया कि इसमें स्प्रिट मिली होती है। इसी वजह से नशा होता है।

चल रही है जांच
पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस पर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। जल्द ही सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा।
-योगेंद्र सिंह, सीओ सिटी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें