आंखों में आंसू भरे पीड़िता का किसान पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए पुलिस की चौखट पर बार-बार दस्तक देता रहा लेकिन पुलिस नहीं पसीजी। आरोप है कि 31 अगस्त को उनकी बेटी अपने पिता, मां और मौसी संग गढ़ी चौकी गई और शिकायत की। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने आठ घंटे तक उसे बैठाए रखा।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों को बुलाया है। उनके आने के बाद केस दर्ज कर लिया जाएगा। कुछ देर बाद चौकी प्रभारी ने पिता पर दबाव बनाया कि तुम्हारी बेटी लौट आई है, अब लिखकर दे दो कि कोई कार्रवाई नहीं करानी है। इनकार पर धमकाते हुए सादे कागज पर दस्तखत करा लिए।
रात नौ बजे तक चौकी पर पीड़िता आरोपियों का इंतजार करती रही। दूसरे दिन फिर थाने गए। वहां भी सुनवाई नहीं हुई। तीन दिन थाने के चक्कर लगाए। न तो मेडिकल जांच कराई और न ही मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता के मुताबिक, पुलिस से शिकायत पर आरोपी विपिन रात को शराब के नशे में उसके घर आ धमका और बहनों से बदसुलूकी की।
धमकी दी कि तहरीर वापस ले लो नहीं तो बहनों से भी दुष्कर्म करूंगा। आरोप है कि आरोपियों ने उसके बहनों के कपड़े फाड़ दिए और जातिसूचक गालियां दीं। इसके बाद अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग, मुख्यमंत्री, डीजीपी को पत्र लिखा। महिला आयोग व अनुसूचित जाति आयोग ने डीसीपी उत्तरी को पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा।
पीड़िता ने परिजनों संग डीसीपी उत्तरी व क्राइम अगेंस्ट वूमेन शालिनी से मुलाकात की। वहां से एसीपी गाजीपुर योेगेश को पत्र भेजा गया। जहां एसीपी ने पीड़िता का बयान लेकर चौकी प्रभारी को तलब किया। पुलिस ने 29 सितंबर को मुकदमा दर्ज किया। प्रभारी निरीक्षक गुडंबा रीतेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आरोपी विपिन व शकील को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश की जा रही है। पीड़िता का आरोप है कि दुष्कर्म का एक आरोपी शकील इलाके में खनन का काम करने वाले का चालक है। उसकी थाने व चौकी में तैनात पुलिसकर्मियों से साठगांठ है जिसके दबाव में पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था।
पीड़िता के पिता ने लापता होने की मौखिक सूचना दी थी। इसके बाद जब लड़की वापस आई तो कार्रवाई न कराने की बात कही। सप्ताहभर बाद डीसीपी उत्तरी कार्यालय में तहरीर दी गई। जांच के बाद पीड़िता का बयान दर्ज कराया गया। फिर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। - रीतेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक गुडंबा