लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दो दिन पहले बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर के प्रमोशन का परिणाम जारी किया है, इसमें अलग-अलग कॉलेजों के लगभग एक दर्जन से अधिक विद्यार्थियों को 600 में से पूरे 600 नंबर मिले हैं।
वहीं, कुछ विद्यार्थियों को 585 नंबर भी मिले हैं। प्रमोशन का आधार विश्वविद्यालय ने इंटरनल मार्क्स को बनाया था। कॉलेजों ने अपने विद्यार्थियों को इंटरनल में दिल खोलकर नंबर दिए और उसका फायदा प्रमोशन में मिला।
हालांकि मामला चर्चा में आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कॉलेजों से बात करने को कहा है। कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दूसरे साल भी फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को छोड़कर प्रमोट करने का निर्णय लिया गया।
इस क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय ने पूर्व निर्धारित फार्मूले के अनुसार इंटरनल नंबर के आधार पर फर्स्ट सेमेस्टर के विद्यार्थियों को प्रमोट करने का निर्णय लिया।
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय से संबद्ध आधा दर्जन सेल्फ फाइनेंस व एक एडेड कॉलेज ने 20 नंबर के इंटरनल में अपने विद्यार्थियों को पूरे 20, 19 नंबर दिए, जिसके आधार पर उनका परिणाम तैयार किया गया तो किसी विद्यार्थी को 600 तो किसी को 585 तक नंबर मिले हैं।
ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 20-25 बताई जा रही है। इसकी चर्चा शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन भी हरकत में आया है। अब वह इसके लिए रास्ते खोज रहा है।
साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि अगर बिना परीक्षा, बिना पढ़ाई इस तरह विद्यार्थियों को नंबरों की रेवड़ी बांटी जाएगी तो वे आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे?
वहीं, विवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि नियमानुसार इंटरनल के नंबरों से परिणाम तैयार किया गया है। कॉलेजों से जो इंटरनल आए, उसके आधार पर परिणाम बना। इसमें विवि ने कोई बदलाव नहीं किया है। पूरे के पूरे नंबर इंटरनल में दिए जाने पर कॉलेजों से बात की जाएगी।
सही मूल्यांकन न होने पर इंटरव्यू में फंस जाएंगे विद्यार्थी
कोरोना के कारण काफी कुछ प्रभावित हुआ है, लेकिन विद्यार्थियों के मूल्यांकन का हमें सही आधार चुनना होगा। सीबीएसई ने इंटरनल का साइंटिफिक तरीका निकाला है। विद्यार्थी को विषय का ज्ञान होना जरूरी है। अगर बिना ज्ञान के उसे पूरे नंबर मिलेंगे तो उसे गलतफहमी पैदा होगी। वह आगे उस लगन से प्रयास नहीं करेगा और उसका भविष्य प्रभावित होगा। ऐसे में हम विद्यार्थी को ठग रहे हैं। विद्यार्थी को विषय का ज्ञान नहीं होगा तो वह फाइनल ईयर में ही फंस जाएगा। उसका ज्ञान कम होगा तो विषय में पकड़ नहीं होगी जबकि किसी प्रतियोगी परीक्षा के इंटरव्यू में विद्यार्थी का ज्ञान ही देखा जाता है। यहां जाकर वह फंस जाएगा। ऐसे में हमें विद्यार्थी के पक्ष में सही असेसमेंट करना होगा। नहीं तो यह उसके लिए फेक सर्टिफिकेट होगा। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में भी मूल्यांकन का सही तरीका बताया गया है। हमें विद्यार्थी के विषयगत ज्ञान के साथ, उसकी हॉबी, पर्सनालिटी, एक्स्ट्रा कॅरिकुलर एक्टिविटी को भी शामिल करना होगा।
- डॉ. अमृता दास, कॅरियर काउंसलर व संस्थापक निदेशक इंस्टीट्यूट फॉर कॅरियर स्टडीज
देखा जाएगा मानकों का पालन हुआ या नहीं
कॉलेजों से इंटरनल के डिटेल मांगे गए हैं। इंटरनल देने के मानक निर्धारित हैं, यह देखा जाएगा कि उन मानकों का पालन हुआ है या नहीं। इस तरह के विशेष नंबर पाने वाली कॉपियों को देखा जाएगा। मेरा मानना है कि ज्यादा से ज्यादा नंबर तात्कालिक खुशी तो देते हैं, लेकिन यह आगे काफी कष्टकारी भी हो सकते हैं। जब आप इतने अधिक नंबर के साथ किसी भी इंटरव्यू बोर्ड के सामने जाते तो हो उसकी भी अपेक्षा आप से बढ़ जाती है। इसलिए विद्यार्थियों का उचित और उनकी क्षमता के अनुसार ही मूल्यांकन होना चाहिए।
- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि