लखनऊ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (नैक) टीम के जाते ही सोमवार को छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। पुरुष छात्रावास के छात्र अगस्त में मेस का अतिरिक्त शुल्क लिए जाने का विरोध कर रहे थे।
दोपहर करीब 12 बजे डीएसडब्ल्यू कार्यालय के बाहर शुरू हुआ छात्रों का धरना-प्रदर्शन करीब चार घंटे तक चला। इस दौरान मांग न मानी जाने से नाराज छात्रों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और बरसात में भी डटे रहे। दो दिन में उचित निर्णय लेने के आश्वासन के बाद छात्र माने।
छात्रों का कहना था कि लाल बहादुर शास्त्री, महमूदाबाद व हबीबुल्लाह छात्रावास में वार्डन अगस्त का मेस शुल्क तीन-चार हजार रुपये मांग रहे हैं। ऐसा न करने पर छात्रावास छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था, जबकि पूर्व में उनसे पूरा शुल्क लिया जा चुका है।
मेस शुल्क भी दो हिस्सों में लिया गया था। उनका कहना था कि परीक्षाएं अगस्त में हैं। विवि प्रशासन की वजह से ही परीक्षा में देरी हुई है। आखिर इसकी सजा अतिरिक्त शुल्क के रूप में उन्हें क्यों दी जा रही है?
इसे दौरान विवि प्रशासन ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन छात्र नहीं माने। दोपहर करीब दो बजे नाराज छात्रों ने अर्द्धनग्न प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विवि प्रशासन ने छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन वह कुलपति को बुलाने पर अड़े रहे। विवि प्रशासन का कहना था कि बिना शुल्क मेस कैसे चलेगी।
छात्रों की ही मांग पर परीक्षा तिथि बढ़ाई गई है। इस पर छात्रों का जवाब था कि कोर्स पूरा नहीं होने के लिए विवि प्रशासन ही जिम्मेदार है। क्योंकि डेढ़ महीने की छुट्टी न की होती तो कोर्स समय से पूरा होता और परीक्षा वक्त पर हो जाती। इस बीच बरसात में भी छात्र डटे रहे।
बदलते रहे अधिकारी, नहीं बनी बात
सबसे पहले प्रोवोस्ट व प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य डॉ. ओपी शुक्ला, डॉ. महेंद्र अग्निहोत्री व डॉ. कमर ने छात्रों को मनाने की कोशिश की। इसके बाद डीएसडब्ल्यू प्रो. पूनम टंडन ने वार्ता की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस क्रम में चीफ प्रोवोस्ट प्रो. नलिनी पांडेय ने भी प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, प्रो. अनूप भारतीय आदि ने वार्ता कर छात्रों को मनाया।
ट्विटर पर अभियान, नैक को किया टैग
जब दो चरणों की वार्ता में बात नहीं मानी गई तो छात्रों ने ट्विटर पर अपनी पीड़ा बयां की और नैक को टैग करके विवि प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना था कि विवि का छात्र प्रेम सिर्फ नैक भ्रमण तक सीमित था।
आंदोलन अमर्यादित, अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
देर शाम चीफ प्रोवोस्ट प्रो. नलिनी पांडेय की ओर से एक पत्र जारी कर कहा गया कि छात्रों ने केवल दस महीने की ही मेस फीस जमा की है, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें 11 महीने की फीस देनी है। अब वे एक महीने की फीस नहीं देना चाह रहे हैं। कोविड के कारण सत्र में देरी हुई है। परीक्षा भी छात्रों की मांग पर आगे बढ़ाई गई। मेस फीस में वृद्धि का गलत प्रचार किया जा रहा है और इसे लेकर आंदोलन अमर्यादित, अनुचित, अशोभनीय था। उनके द्वारा विवि के कामकाज को बाधित करने का प्रयास किया गया। विवि प्रशासन उनके इस कृत्य पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।
छात्रों को आश्वस्त किया गया है कि उनकी मांगों पर दो दिन में सकारात्मक विचार किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने अपना धरना समाप्त कर दिया है।
- प्रो. राकेश द्विवेदी, चीफ प्रॉक्टर, लविवि