लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को शुद्ध, स्वस्थ और उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराने, चीनी उद्योग को स्थायी मजबूती देने के लिए मजबूत गन्ना उत्पादन प्रणाली लागू होगी। इसके तहत प्रदेश में चरणबद्ध ढंग से पुरानी व रोगग्रस्त बीज गन्ना सामग्री के स्थान पर गुणवत्ता युक्त बीज के प्रतिस्थापन की व्यवस्था लागू की जाएगी।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) परिसर में आईआईएसआर–इस्मा की हुई उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक में इस पर सहमति बन गई है। इससे पहले प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (शर्करा) अश्विनी श्रीवास्तव के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में चल रहे शोध कार्यों का अवलोकन किया और सराहना की। प्रतिनिधिमंडल में इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी, केएम शुगर मिल्स के प्रबंध निदेशक आदित्य झुनझुनवाला, पूर्व कुलपति डॉ. सुशील सोलोमन तथा गन्ना व एथानॉल विभाग के निदेशक (तकनीकी एवं सांख्यिकी) दीप मलिक शामिल रहे।
संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि इस संयुक्त पहल के तहत इस्मा के सहयोग से संस्थान में आधुनिक बीज उत्पादन इकाई की स्थापना की जाएगी। ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) प्रयोगशाला को सुदृढ़ किया जाएगा ताकि रोगमुक्त बीज तैयार हो सकें। साथ ही गन्ने की कटाई के लिए होल केन हार्वेस्टर के विकास और जैविक कीट नियंत्रण उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए भी इकाई स्थापित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश में स्वस्थ बीज गन्ना की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त गन्ना उपलब्ध हो सकेगा। प्रतिनिधिमंडल ने आईआईएसआर को प्रदेश की 120 चीनी मिलों के लिए ‘प्रकाश स्तंभ’ बताते हुए गन्ना एवं चीनी उत्पादन में इसके योगदान की सराहना की।
संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि प्रस्तावित योजनाओं के लिए शीघ्र ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया जाएगा और आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक व भ्रमण के दौरान संस्थान के सभी विभागाध्यक्ष और वैज्ञानिक भी मौजूद रहे।
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संस्थान परिसर में भ्रमण कर स्थित का जायजा लेते गन्ना संस्थान और इस्मा के अधिकारी। स्रोत ः विभाग
संस्थान परिसर में भ्रमण कर स्थित का जायजा लेते गन्ना संस्थान और इस्मा के अधिकारी। स्रोत ः विभाग
संस्थान परिसर में भ्रमण कर स्थित का जायजा लेते गन्ना संस्थान और इस्मा के अधिकारी। स्रोत ः विभाग