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यूपी: सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से खाद का संकट, मानदेय बकाया होने से नाराज हैं सचिव

Mon, 26 Oct 2026 08:59 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से खाद का संकट पैदा हो गया है। समितियों में खाद होने के बाद भी वितरण नहीं हो पा रहा है। मानदेय बकाया होने से सचिव नाराज चल रहे हैं। 
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खाद संकट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से खाद का वितरण प्रभावित हो रहा है। समितियों के गोदामों में खाद उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को डीएपी और यूरिया नहीं मिल पा रही है। आलू की बोआई के साथ गेहूं की खेती की तैयारी के बीच किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सचिव मानदेय और बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने से नाराज हैं। वे चार दिन से लखनऊ के ईको गार्डन में अनशन कर रहे हैं।

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प्रदेश में आठ हजार से अधिक सहकारी समितियां संचालित हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। सहकारिता विभाग में करीब 2002 सचिव हैं। अन्य समितियों में सचिवों की नियुक्ति संबंधित समिति का संचालक मंडल करता है। सचिवों का आरोप है कि उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है। 

सचिवों के साथ आंकिक, चौकीदार और कंप्यूटर ऑपरेटर भी भुगतान नहीं होने से परेशान हैं। साधन समिति सचिव परिषद के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी का दावा है कि हर जिले में समितियां बंद हैं। सचिवों के हस्ताक्षर से खाद का वितरण होता है, इसलिए उनके कार्य बहिष्कार से किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।

बकाया भुगतान समेत कई मांगें

सचिवों ने सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त एवं निबंधक को पत्र भेजकर नॉन-कैडर सचिवों, लिपिकों, विक्रेताओं और चौकीदारों को उनकी पदगत स्थिति के आधार पर वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा बकाया मानदेय और वेतन का तत्काल भुगतान, हड़ताल करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ के निर्णय का पालन करने की मांग की है।

एस्मा लागू, जिलों में चेतावनी

हड़ताल को देखते हुए सहकारिता विभाग ने उप्र अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) 1966 लागू कर दिया है। कानपुर देहात, संत रविदासनगर और श्रावस्ती समेत कई जिलों में जिलाधिकारियों ने सचिवों को चेतावनी पत्र जारी किए हैं। खाद वितरण तत्काल शुरू नहीं करने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं, सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सचिवों के बकाया मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

खाद के लिए किसान परेशान

आजमगढ़ के मानपुर निवासी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि आलू की बोआई शुरू हो गई है, लेकिन तीन दिन से समिति के चक्कर लगाने के बावजूद डीएपी नहीं मिली। निजी दुकानदार मनमानी कीमत मांग रहे हैं। अंबेडकरनगर के रंजीत वर्मा ने बताया कि वह दो दिन से दरजीतपुर और अजमेरी बादशाहपुर समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समितियां बंद होने से यूरिया और डीएपी नहीं मिल रही। आलू की बुवाई नहीं हो सकी है और गेहूं की खेती पर भी संकट मंडराने लगा है।

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