उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से खाद का वितरण प्रभावित हो रहा है। समितियों के गोदामों में खाद उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को डीएपी और यूरिया नहीं मिल पा रही है। आलू की बोआई के साथ गेहूं की खेती की तैयारी के बीच किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सचिव मानदेय और बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने से नाराज हैं। वे चार दिन से लखनऊ के ईको गार्डन में अनशन कर रहे हैं।
सचिवों ने सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त एवं निबंधक को पत्र भेजकर नॉन-कैडर सचिवों, लिपिकों, विक्रेताओं और चौकीदारों को उनकी पदगत स्थिति के आधार पर वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा बकाया मानदेय और वेतन का तत्काल भुगतान, हड़ताल करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ के निर्णय का पालन करने की मांग की है।
हड़ताल को देखते हुए सहकारिता विभाग ने उप्र अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) 1966 लागू कर दिया है। कानपुर देहात, संत रविदासनगर और श्रावस्ती समेत कई जिलों में जिलाधिकारियों ने सचिवों को चेतावनी पत्र जारी किए हैं। खाद वितरण तत्काल शुरू नहीं करने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं, सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सचिवों के बकाया मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
आजमगढ़ के मानपुर निवासी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि आलू की बोआई शुरू हो गई है, लेकिन तीन दिन से समिति के चक्कर लगाने के बावजूद डीएपी नहीं मिली। निजी दुकानदार मनमानी कीमत मांग रहे हैं। अंबेडकरनगर के रंजीत वर्मा ने बताया कि वह दो दिन से दरजीतपुर और अजमेरी बादशाहपुर समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समितियां बंद होने से यूरिया और डीएपी नहीं मिल रही। आलू की बुवाई नहीं हो सकी है और गेहूं की खेती पर भी संकट मंडराने लगा है।