लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के स्ट्रीट वेंडर्स (पटरी दुकानदारों) के हित में एक बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के तहत जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी अपना सर्वेक्षण पूरा नहीं कर लेती और पात्र दुकानदारों को प्रमाणपत्र जारी नहीं कर देती, तब तक किसी भी वर्तमान दुकानदार को उसकी जगह से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी जोड़ी है कि ये दुकानें यातायात के सुचारू संचालन में बाधा नहीं बननी चाहिए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अमीनाबाद के दुकानदार अमर कुमार सोनकर व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि अधिनियम के लागू होने के 11 वर्ष बाद भी सर्वेक्षण, योजना और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अब तक लंबित है। कोर्ट ने कहा कि जब तक विधि सम्मत सर्वे पूरा नहीं होता और राज्य सरकार वेंडिंग योजना को मंजूरी नहीं दे देती, तब तक धारा 3(3) के तहत दुकानदारों को कानूनी संरक्षण प्राप्त रहेगा।
वहीं, नगर निगम ने स्वीकार किया कि वेंडिंग प्लान तैयार है, लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि राज्य सरकार की मंजूरी के बिना वेंडिंग प्लान कानून की नजर में अस्तित्वहीन है। अदालत ने नगर निगम को जल्द वेंडिंग प्लान फाइनल करने के निर्देश दिए हैं और मामले को तीन माह बाद सूचीबद्ध किया है।
दुकानदारों का कहना था कि सर्वे का काम तो कागजों पर पूरा हो गया है, लेकिन उन्हें अब तक वेंडिंग सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है, जिससे उन पर हमेशा हटाए जाने की तलवार लटकी रहती है। कोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि याचियों सहित सभी मौजूदा स्ट्रीट वेंडरों के साथ एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ही व्यवहार किया जाए।