मोहनलालगंज। संपूर्ण समाधान दिवस पर न्याय मिलने की उम्मीद लेकर आने वाले फरियादियों के साथ अब मजाक किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों या पुलिसकर्मियों पर मिलीभगत और घूसखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हीं को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी जा रही है। परिणामस्वरूप आरोपी ही अपनी जांच कर खुद को क्लीन चिट दे रहे हैं। अधिकारी भी उनकी रिपोर्ट को अंतिम मानते हुए शिकायतों को निस्तारित बता रहे हैं।
ऐसा ही मामला मोहनलालगंज के धर्मेंद्र कुमार यादव का सामने आया है। उन्होंने 2 सितंबर को संपूर्ण समाधान दिवस में नायब तहसीलदार निगोहां के पेशकार पर पांच सौ रुपये की घूस लेने के बाद भी दाखिल-खारिज का आदेश न करवाने की शिकायत की थी। अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए पीठासीन अधिकारी को निर्देश दिए। इसके बाद आरोपी को ही पूरे मामले का जांच अधिकारी बना दिया गया। उसने जांच के नाम पर खुद को क्लीन चिट देकर मामले का निस्तारण करते हुए 17 सितंबर को आनन-फानन में दाखिल-खारिज का आदेश करवाकर 20 सितंबर को मामले के निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे मामलों से संपूर्ण समाधान दिवस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
एसडीएम पवन पटेल के मुताबिक अगर पेशकार या लेखपाल के खिलाफ कोई शिकायत है तो उस मामले की जांच राजस्व निरीक्षक या उससे उच्च अधिकारी को ही करनी चाहिए। अगर ऐसा है तो गलत है। प्रकरण संज्ञान में नहीं है, मामले की जांच कराएंगे।