परिवार परामर्श केन्द्र में आने वाली एक शिकायत में पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसके माता-पिता को साथ नहीं रखना चाहती है। इसे लेकर अक्सर झगड़े होते हैं। घर में तोड़-फोड़ के साथ कोई काम न करना, हर वक्त ताने मारना, चीखना-चिल्लाना आम बात है। मना किया तो मायके जाने, तलाक और गुजारा भत्ते की मांग। फिलहाल पत्नी मायके में है और लगातार खर्च मांग रही है। युवक सुलह करके उसे घर ले जाना चाहता है।
ताने-धमकियां, दुर्व्यवहार पुरुषों के खिलाफ हथियार
भारतीय सेना और यूपी पुलिस परिवार परामर्श केन्द्रों की सलाहकार डॉ. इंदु सुभाष बताती हैं कि लॉकडाउन से लेकर अब तक बड़ी संख्या में पुरुषों ने मदद की गुहार लगाई है। हेल्पलाइन पर फोन करके, ईमेल के जरिए, रजिस्टर्ड डाक, वाट्सएप और सोशल मीडिया मेसेंजर के जरिए प्रतिदिन 30 से 35 शिकायतें पुरुषों से संबंधित आती रही हैं। सिलसिला जारी है। जहां तक सवाल पुरुषों पर घरेलू हिंसा का है तो दहेज के मुकदमे की धमकी, पुलिस को फोन करने की धमकी, घर में तोड़फोड़, माता-पिता से दुर्व्यवहार, अन्य पुरुषों से संबंध, इसी के प्रकार हैं।
सुरक्षा परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसलर डॉ. स्वर्णिमा सिंह कहती हैं कि बीते दो साल में शिकायतें आने का सिलसिला बढ़ा है। खास बात है कि पुरुष तलाक नहीं सुलह पर जोर देते हैं। परिवार का सम्मान उन्हें प्यारा होता है। इसके अलावा महिलाओं की तरह उनके पास ये विकल्प तो होता नहीं है कि वे मायके जाकर बैठ जाएं। मार्च से लेकर अब तक की बात करें तो कुल शिकायतों में से 40 फीसदी मामले पुरुषों की शिकायतों के हैं।
बढ़ती आत्महत्या व शराब की लत भी इसकी एक वजह
डॉ. इंदु सुभाष और डॉ. स्वर्णिमा सिंह कहती हैं कि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की आत्महत्या की दर महिलाओं से ढाई गुना ज्यादा है। इसका प्रमुख कारण उन पर बढ़ता मानसिक व सामाजिक दबाव और कोई हेल्प डेस्क का न होना है। इसके कारण वह शराब की लत का शिकार भी होता है। खुद को निर्दोष साबित करने के लिए पुरुषों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है।