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'लोग तो आज तक हो जाते हैं कन्फ्यूज 'मैं बेटी हूं या बहू', एक दूसरे की पार्टी प्लान करते हैं हम'

Wed, 08 Aug 2018 04:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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उपासना व रश्मि रस्तोगी - फोटो : amarujala
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आज रिश्ता खट्टा-मीठा में कहानी है गोमती नगर निवासी उपासना व रश्मि रस्तोगी की। पिछले 18 साल से समझदारी के साथ उन्होंने अपने रिश्तों को संभाला हुआ है। खास बात है कि एक-दूसरे का साथ ही उनके परिवार की ताकत है। सुख-दुख सब साथ में बांटते हुए उनका रिश्ता आगे बढ़ रहा है।    
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उपासना बताती हैं कि मेरे सास-ससुर के बेटी नहीं है। मैं ही इनके लिए बेटी बनकर आई। मम्मी ने कहा कि उन्हें बेटी चाहिए थी, बहू के रूप में मिल गई। बेटी की तरह व्यवहार करने के अपने वादे को वे आज तक निभा रही हैं।

मेरे सास-ससुर मेरा लोगों से परिचय अपनी बेटी के रूप में ही कराते आ रहे हैं। इसके चलते लोगों के लिए तय कर पाना मुश्किल होता है कि मैं बेटी हूं या बहू। रश्मि रस्तोगी कहती हैं कि सच ही तो है उपासना हमारी बेटी ही है, उसे हमारे घर भेजकर ईश्वर ने हमारे जीवन में बेटी की कमी पूरी कर दी। 
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उपासना कहती हैं कि हम दोनों सास-बहू को एग्जीबिशन देखने का बहुत शौक है। शहर में कहीं भी प्रदर्शनी लगी हो, हम दोनों में से किसी का भी यदि मन है तो हम दोनों पहुंच जाते हैं। उस वक्त हमें किसी और के साथ की जरूरत नहीं होती। हम दोनों ही एक-दूसरे की पसंद से वाकिफ हैं, यही वजह है कि हम शॉपिंग किसी और के साथ नहीं करते।
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छोटी-छोटी चीजें उन्होंने सिखाईं

उपासना - फोटो : amarujala
उपासना कहती हैं कि जब मेरी शादी हुई, उस वक्त मैं टीचिंग जॉब में थी। मुझे किचन का कोई काम भी नहीं आता था। सच कहूं तो किसी भी नई दुल्हन के लिए ये बहुत बड़ी बात है। पर मम्मी ने मुझे इसका आभास तक नहीं होने दिया कि मुझे कुछ आता नहीं।

एक  मां जैसे अपनी बेटी को टिफिन लगा कर देती है, उसी तरह मम्मी ने मेरे लिए खाना तैयार किया। साथ ही सिखाती भी रहीं, कि क्या कैसे बनता है। घर कैसे संभाला जाता है....और भी बहुत कुछ। सच कहूं तो उन्होंने इसका भी अहसास होने नहीं दिया कि वह मुझे कुछ सिखा रही हैं।  

हमारे बीच समझ ऐसी है कि बिना कुछ कहे एक-दूसरे की बातें समझ आ जाती हैं। जब मैं अपनी फ्रेंड्स के लिए पार्टी का प्लान बनाती हूं तो उसका ले-आउट वह तैयार करती हैं। मैं बेफिक्र रहती हूं कि जो अरेंजमेंट वह करेंगी, वह बेस्ट होगा।

जबकि जब उनकी फ्रेंड्स को बुलाना होता है तो मेहमाननवाजी का सारा जिम्मा मेरा होता है। जहां स्थिति ऐसी होती है कि हम दोनों को ही देखना है तो वह मुझे फ्रंट पर लाकर खुद पीछे से सारी तैयारियां संभाल लेती हैं। 
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