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सुना है क्या: नेताजी के दोनों हाथों में लड्डू की कहानी, साथ ही 'आफत में माननीय और अधर में लटकी टीम' के किस्से

Wed, 23 Sep 2026 12:29 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'नेताजी के दोनों हाथों में लड्डू' की कहानी। इसके अलावा 'आफत में माननीय' और 'अधर में लटकी टीम' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

नेताजी के दोनों हाथों में लड्डू

प्रदेश में शिक्षक नेताओं के चुनाव की डुगडुगी बज गई है। इसमें शिक्षकों के एक नेताजी के दोनों हाथ में लड्डू दिख रहे हैं। दरअसल, नेताजी खुद अपना शिक्षक संघ छोड़कर सत्ताधारी दल से हाथ मिलाने को तैयार हैं। इसके लिए पूरी फील्डिंग भी हो चुकी है। इसके बाद भी उनका शिक्षक संघ उनके समर्थन में है। चर्चा तो यहां तक है कि उनकी सीट के संबंधित जिलों ने इस बारे में लिखत-पढ़त में नेताजी के समर्थन की बात तक कह दी है। इससे नेताजी गदगद हैं क्योंकि उनके दोनों हाथों में लड्डू हैं।

आफत में माननीय

आजकल राजधानी के पास वाली औद्योगिक नगरी का सियासी पारा गरम है। देश के किसी सबसे पिछड़े इलाके से भी बदतर सड़कें, जाम और गड्ढों ने उन लोगों को भी दुश्मन बना दिया है जो सोते-जागते पार्टी का नाम जपते थे। सत्तारूढ़ दल के तीन माननीयों की हार का सट्टा इस पर चल रहा है कि कौन कितने वोटों से हार का रिकार्ड बनाएगा। भनक पाकर एक माननीय सोशल मीडिया पर मुस्तैद हो गए हैं तो दूसरे का दिल्ली आने-जाने का खर्च बढ़ गया है।

अधर में लटकी टीम

जापान पैरा एशियाई खेलों के लिए तमाम खेलों में देश की टीमों की घोषणा हो चुकी है लेकिन सबसे ज्यादा पदक की उम्मीद वाले खेल में टीम का चयन अभी लटका है। तीन खिलाड़ी टीम में जगह पाने को लेकर कोर्ट से गुहार कर चुके हैं। लिहाजा मंत्रालय ने भी अपने हाथ खींच लिए। मामला उलटा न हो जाए, इस डर से दल को मंजूरी नहीं दी। हालांकि, व्हाट्सएप ग्रुप में खिलाड़ियों की किट के साइज फाइनल हो गए। अब उनके सपनों को मंत्रालय पूरा करने से रहा। इस मामले में जीत-हार का फैसला मैदान में नहीं, अदालत की चौखट से होने की उम्मीद ही है।

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