दे मस्त फकीरी वह जिससे, शाहों की पर्वाह न हो।
मैं भी न किसी का शाह बनूं, मेरा भी कोई शाह न हो।
रामनगरी में यह संदेश देने वाले स्वामी नारायण मंदिर के सत्यकुलाचार्य साधु स्व. लालजी भाई सत्यस्नेही अब नहीं रहे, मगर उनका बनवाया सर्वधर्म समभाव मंदिर आपसी प्रेम व एकता की अनोखी अलख जगा रहा है। इस गुजराती मंदिर में सत्य-अहिंसा की बड़ी मूर्तियों के साथ राम-कृष्ण, यीशु, बुद्ध, महावीर, जरथुस्त्र की प्रतिमा स्थापित है। विग्रह के साथ एक किनारे मक्का तो दूसरे किनारे मदीना की फोटो भी लगी है। रोज सुबह-शाम आरती होती है। यहां एक साथ सभी धर्मों के रंग देख आने वाले भक्त-पर्यटक भाव विह्वल नजर आते हैं।
हनुमानगढ़ी से चंद कदम दूर दंतधावनकुंड के पास गुजराती भवन में स्थित सर्वधर्म समभाव मंदिर में जो भी आता है, भगवान के हर रूप का दर्शन कर धन्य महसूस करता है। मंदिर के बाहर दीवार पर मस्तफकीरी की प्रार्थना और सबसे बड़ी भिक्षाएं का संदेश पत्थर पर खुदा है। अयोध्या विवाद के फैसले के मद्देनजर पुलिस की बढ़ती गश्त व लोगों की चिंताओं के बीच गुजरातियों का सर्वधर्म समभाव मंदिर अलग ही छटा बिखेर रहा है।