समाजवादी पार्टी की सरकार आने के साथ ही चहेते जिले में तैनाती लेने का दम भरने वाले एक पुलिस अधिकारी को राज्य सरकार ने हटा कर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया।
अधिकारी की समझ में नहीं आ रहा है कि इनका काम किसने लगाया। उन्होंने तो अपनी तरफ से जिले में पार्टी के सभी नेताओं को पूरी तवज्जो दी थी।
बाकी का राज-काज अपने हिसाब से चल रहा था। उन्होंने भरसक कोशिश भी की थी, कि उनके काम में कोई शिकायत न रहे।
लेकिन जिस जिले में वह तैनात थे, वह उससे कहीं बड़ा चार्ज चाहते थे।
एक समय तो उन्होंने अपना नाम लखनऊ के कप्तान पद के लिए भी चलवाने की कोशिश की थी, पर कामयाबी नहीं मिल सकी थी।
ऐसे में अब साहब को यह नहीं समझ में आ रहा है कि उनका काम किसी दूसरे ने लगाया या उनकी महत्वाकांक्षा ने।