जो विभाग कभी सन्नाटे में हुआ करता था, आजकल वह चर्चा में है। चर्चा फिल्मों को टैक्स फ्री करने और अनुदान देने को लेकर है।
विभाग में तो वैसे टॉप टू बाटम सभी अधिकारी हैं, लेकिन सबको सभी जानकारियां नहीं होती हैं। चाहे अनुदान देने को लेकर हों या फिल्मों को टैक्स फ्री करने को लेकर।
सब-कुछ होने के बाद ही नीचे वालों को पता चलता है। नीचे वालों से सिर्फ इतना कहा जाता है कि निर्णय हो गया है केवल आदेश बना लाओ। इसको लेकर विभाग वाले भी हैरान हैं।
वह डर के मारे देर तक ऑफिस में बैठे रहते हैं कि कब कौन से आदेश बनाने को कह दिया जाए।
यहां के कुछ कर्मियों से एक दिन ऐसे ही कुछ साथियों ने पूछ लिया कि भाई चलना नहीं है, तो बेचारे क्या कहते।
बस इतनी ही बोले, घर से आने से तो अच्छा है कि कुछ देर बैठकर इंतजार कर लिया जाए।