यह कहावत यूं ही नहीं है कि लागी आसानी से नहीं छूटती है। मामला रालोद से जुड़े एक नेता का है।
ऐसे नेता का जो कई बार विधायक और मंत्री भी रह चुके है। रालोद में थे तो चौधरी साहब के काफी करीबी भी माने जाते थे।
ताजनगरी के रहने वाले नेताजी का पिछले दिनों अपने घर से ऐसा मन उचटा कि सियासी भविष्य संवारने को पुराने घर से रुखसती लेकर भगवा चोला धारण कर लिया है।
पर, लखनऊ आते हैं तो उनकी गाड़ी का रुख स्वत: पुराने घर की तरफ हो जाता है। पहले रालोद वाले पुराने साथियों से राम-जोहार और फिर नई पार्टी की ओर रुख।
भरोसा ऐसा कि गाड़ी भी रालोद पर ही खड़ी तक देते हैं। रालोद दफ्तर में भाजपा का झंडा देख लोग चौंकते हैं।
जो नहीं जानते वह यह अटकलें भी लगाने लगते हैं कि यह रालोद और भाजपा के बीच भावी रिश्तों का प्रारंभ तो नहीं है।