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यूं ही नहीं फिसली जुबान

Fri, 03 Jan 2014 10:29 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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दंगा राहत शिविरों में बच्चों की मौतों पर गृह विभाग के हुजूर-ए-आला के बयान पर तूफान खड़ा हो गया।
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सरकार तक को सफाई देनी पड़ी। सत्ता के गलियारे में अफसर के बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

अफसरों का एक खेमा मान रहा है कि आला अफसर का बयान अनायास नहीं था। दरअसल, होम की पोस्टिंग उन्हें बहुत रास नहीं आ रही।

रुतबा तो है, लेकिन नई सरकार बनने के बाद उन्हें मिले पहले विभाग में जो बात थी, वह यहां नहीं है। फिर उसी विभाग की कमान संभालने की छटपटाहट है। होम से पिंड छूटे तभी कुछ हो सकता है।

ऐसे तो बात बनती नहीं दिख रही थी। विवादित बयान के बाद लग रहा था कि उनकी शिफ्टिंग हो जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

सरकार ने जुबान पर काबू रखने की नसीहत देकर मामले को ठंडा कर दिया। पसंदीदा विभाग में पहुंचने की साहब की हसरत धरी रह गई। अब कोई और उपक्रम करना होगा।
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