एक विभाग आजकल सुर्खियों में है। अफसरों को इधर-उधर करने वाले इस विभाग का काम ठेठ सरकारी बाबू का है।
फरमान ऊपर से आते हैं और विभाग के मुखिया को बस उस पर चिड़िया बैठानी होती है। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इस विभाग को हाई प्रोफाइल बना दिया है। मीडिया मुखिया के पीछे-पीछे भाग रहा है, लेकिन वह हैं कि मिल ही नहीं रहे।
पंचम तल से लेकर पीएमओ तक, सब की नजर उन पर है। फरमान के कारण अब बिरादरी के लोगों के बीच उनकी किरकिरी होने लगी है। बिरादरी के लोग कहते हैं कि आखिर इतनी भी क्या निष्ठा, जो रात में आदेश जारी किए गए।
सुबह कर देते तो क्या बुराई थी। कुर्सी किसी की नहीं होती है तो उनके पास हमेशा के लिए कैसे रहेगी? सत्ता में अपना वजन बढ़ जाने से साहब अब खास लोगों से भी नहीं मिल रहे हैं।
बिरादरी के लोग कहते हैं कि सत्ता का नशा सूरज की तरह होता है। पक्षी जब सूरज की तरफ आकर्षित होता है तो उसे लगता है कि तपिश से उसका कुछ नहीं होगा, लेकिन पास जाते ही पंख जल जाते हैं और वह धड़ाम से नीचे आ जाता है।
भले ही गर्मी सहने का भरपूर माद्दा हो। इसके तमाम उदाहरण पिछली सरकार में देखे जा सकते हैं। जो करीब गया, उसको उतनी ही बड़ी पटकनी मिली। लेकिन साहब हैं कि समझते ही नहीं। लिहाजा कहते हैं कि सत्ता के पास जाने से कभी न कभी पंख तो जलेंगे ही।