राजस्व वसूली न होने की दुहाई देने वाली बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को नियमित बिल ही नहीं भेज पा रही हैं। इस लापरवाही की पोल शुक्रवार को शक्ति भवन में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की समीक्षा बैठक में खुल गई। समीक्षा में सामने आया कि बिलिंग एजेंसियां कई-कई महीने उपभोक्ताओं के यहां रीडिंग ही लेने नहीं जा रही हैं।
बिलिंग एजेंसियों की इस कारगुजारी पर पावर कॉर्पोरेशन व बिजली कंपनियों के आला अधिकारी आंखे मूंदे हैं। ऊर्जा मंत्री ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि अगर किसी भी उपभोक्ता की मीटर रीडिंग तीन महीने से ज्यादा स्टोर होती है तो उसके बिल की वसूली एजेंसी से कराई जाए।
प्रदेश में बिजली कंपनियों ने जुलाई 2018 में बिलिंग एजेंसियों से करार किया था जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में जनवरी 2019 व ग्रामीण क्षेत्रों में जुलाई 2019 तक 97 प्रतिशत डाउनलोडेबल बिलिंग की जानी थी। समीक्षा में सामने आया कि बिलिंग एजेंसियों ने निर्धारित शर्तों का पालन और अधिकारी भी हाथ-हाथ पर धरे बैठे रहे। नतीजा यह है कि न तो उपभोक्ताओं को बिल मिल पा रहे हैं और न ही बिजली कंपनियों को राजस्व। इससे घाटा साल दर साल बढ़ रहा है और बिजली कंपनियां अपने स्तर पर सुधार के बजाय दरें बढ़ाकर घाटे की भरपाई की जुगत में लगी हैं।
ऊर्जा मंत्री ने इस लापरवाही पर पावर कॉर्पोरेशन के आला अफसरों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अब ये नहीं चलेगा। उन्होंने बिलिंग के संबंध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से पूरी रिपोर्ट तलब करते हुए कहा कि उपभोक्ता हितों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।