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अवैध मस्जिद निर्माण पर हाईकोर्ट का आदेश, धर्मस्थलों के नाम पर हो रहे अतिक्रमण तत्काल रोकें

Sat, 24 Feb 2018 10:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Supreme Court
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हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश भर में धर्म स्थलों के नाम पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को तत्काल रोका जाना चाहिए। जो कुछ भी अवैध है उसे खत्म होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी और विशेषकर कलेक्टर जो राजस्व का भी अधिकारी होता है वह कृषि भूमि पर अवैध कब्जे और उसका स्वरूप बदलने से रोकें।

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कोर्ट ने कहा कि कानून के विपरीत कोई भी धार्मिक अधिकार नहीं दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कड़ी कार्रवाई करना न सिर्फअधिकारियों का संवैधानिक और कानूनी उत्तरदायित्व है बल्कि आम जनता को कानून का पालन करने के लिए बाध्य करने के लिए भी जरूरी है।

फतेहपुर के मोहम्मद हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने कृषि भूमि पर वक्फ बनाकर मस्जिद बना लेने को अवैध करार दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि कृषि भूमि सरकार की होती है, किसान सिर्फ इसका किरायेदार होता है। जो जमीन वक्फ की नहीं है उस पर वक्फ की मस्जिद नहीं बनाई जा सकती है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में निर्देश जारी करें कि वह कृषि भूमि पर बिना उसका स्वरूप परिवर्तित किए अवैध तरीके से बनाए गए धर्मस्थलों पर कार्रवाई करें। कोर्ट ने तीन माह बाद इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।

पहले भी दिया था अवैध धर्मस्थल हटाने का आदेश

हाईकोर्ट ने 2016 में लवकुश व अन्य की याचिका में आदेश दिया था कि राजमार्गों, सड़कों, गलियों और रास्तों में यातायात के लिए अवरोध बने ऐसे निर्माण जो एक जनवरी 2011 के बाद बने हैं हटाए जाएं।

सड़क पर अतिक्रमण करने का किसी को भी मौलिक अधिकार नहीं है। मुख्य सचिव को आदेश दिया था कि सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सामान्य निर्देश जारी करें वह धर्मस्थल बनाने के नाम पर अवैध कब्जा न होने दें। कोर्ट ने कहा है कि 10 जून 2016 के हुए किसी भी अवैध धार्मिक निर्माण की जवाबदेही डीएम, एसडीएम, एसएसपी और सीओ की होगी।
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यह था मामला

फतेहपुर के चौरयानी गांव के महमूद कृषि भूमि पर गरीब नवाज नाम से वक्फ संपत्ति और मस्जिद का निर्माण करा लिया था। मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाकर नमाज पढ़ने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो मामला जिलाधिकारी के पास पहुंचा। जिलाधिकारी ने कृषि भूमि पर किए निर्माण को अवैध करार दे दिया।

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को सही करार देते हुए कहा कि याची ने बिना अनुमति के कृषि भूमि पर मदरसा और मस्जिद का निर्माण कर लिया है। मुस्लिम कानून में वक्फ संपत्ति पर ही मस्जिद बनाई जा सकती है।

वक्फ बनाने वाला भी उस भूमि का स्वामी होना चाहिए। वक्फ बोर्ड में पंजीकृत होने मात्र से कोई वक्फ वैध नहीं हो जाता है। कृषि भूमि पर निर्माण के लिए जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 143 के तहत भूमि उपयोग बदलने की उद्घोषणा प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
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