हाईकोर्ट ने 2016 में लवकुश व अन्य की याचिका में आदेश दिया था कि राजमार्गों, सड़कों, गलियों और रास्तों में यातायात के लिए अवरोध बने ऐसे निर्माण जो एक जनवरी 2011 के बाद बने हैं हटाए जाएं।
सड़क पर अतिक्रमण करने का किसी को भी मौलिक अधिकार नहीं है। मुख्य सचिव को आदेश दिया था कि सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सामान्य निर्देश जारी करें वह धर्मस्थल बनाने के नाम पर अवैध कब्जा न होने दें। कोर्ट ने कहा है कि 10 जून 2016 के हुए किसी भी अवैध धार्मिक निर्माण की जवाबदेही डीएम, एसडीएम, एसएसपी और सीओ की होगी।
फतेहपुर के चौरयानी गांव के महमूद कृषि भूमि पर गरीब नवाज नाम से वक्फ संपत्ति और मस्जिद का निर्माण करा लिया था। मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाकर नमाज पढ़ने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो मामला जिलाधिकारी के पास पहुंचा। जिलाधिकारी ने कृषि भूमि पर किए निर्माण को अवैध करार दे दिया।
इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को सही करार देते हुए कहा कि याची ने बिना अनुमति के कृषि भूमि पर मदरसा और मस्जिद का निर्माण कर लिया है। मुस्लिम कानून में वक्फ संपत्ति पर ही मस्जिद बनाई जा सकती है।
वक्फ बनाने वाला भी उस भूमि का स्वामी होना चाहिए। वक्फ बोर्ड में पंजीकृत होने मात्र से कोई वक्फ वैध नहीं हो जाता है। कृषि भूमि पर निर्माण के लिए जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 143 के तहत भूमि उपयोग बदलने की उद्घोषणा प्राप्त करना अनिवार्य होता है।