लखनऊ। बकाया भुगतान में गड़बड़ी की शिकायतों और कार्यकारिणी बैठक में आय-व्यय का मासिक ब्यौरा पेश न किए जाने पर महापौर की नाराजगी के बाद नगर आयुक्त ने बुधवार को ठेकेदारों के बकाया भुगतान पर रोक लगा दी। अब अपर नगर आयुक्त और मुख्य वित्त लेखाधिकारी मिलकर अपने स्तर से एक लाख रुपये तक का ही भुगतान कर पाएंगे। इससे अधिक का भुगतान नगर आयुक्त की मंजूरी से होगा। यही नहीं किसका भुगतान होगा, यह तय करने के लिए अब हर बुधवार को नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक होगी। सितंबर से कैश बुक पूरी तरह डिजिटल होगी और सभी भुगतान आरटीजीएस से किए जाएंगे।
नगर आयुक्त ने इंद्रमणि त्रिपाठी ने बुधवार को लेखा विभाग के कामकाज की समीक्षा के लिए हुई बैठक में उन्होंने लेखा विभाग के कामकाज में बदलाव को लेकर कड़े निर्देश दिए। लेखा विभाग में लेखाकार, सहायक लेखाकार और बाबुओं को योग्यता और विश्वसनीयता के आधार पर काम का बंटवारा किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने तीन साल से अधिक समय से तैनात उन तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी हटाने का आदेश दिया जिनको लेकर कई शिकायतें आ रही थीं। शाम को तीनों कर्मचारी लेखा विभाग से हटा भी दिए गए।