एनकाउंटर में अहम रोल अदा करने वाली यूपी एसटीएफ की ओर से बताया गया है कि सामने मवेशियों का झुंड आने से कार पलट गई। कार में बैठे पुलिसकर्मी कुछ देर के लिए अचेतावस्था में आ गए लेकिन विकास दुबे को कुछ नहीं हुआ और वह इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी की पिस्टल छीनकर फरार होने लगा।
पीछे से आ रही एसटीएफ की टीम ने उसका पीछा किया, उससे सरेंडर करने को कहा, लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी और जवाबी फायरिंग में घायल हुआ, उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि विकास दुबे के कई साथी फरार थे ऐसे में खतरा इस बात का था कि उसे छुड़ाने के लिए हमला किया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत उसे एक गाड़ी से दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया गया था।
उन्होंने बताया कि रात भर गाड़ी चलाकर ड्राइवर भी थक गया था, ऐसे में वह अचानक सामने आए मवेशियों की वजह से गाड़ी पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार पलट गई।
टोल प्लाजा पर रोकी गई गाड़ियों केसंबंध में उन्होंने बताया कि कानपुर में विकास दुबे का वर्चस्व रहा है। ऐसे में कानपुर के करीब उस पर खतरा अधिक था। कोई मीडिया कर्मी के रूप में काफिले में न शामिल हो जाए, इसलिए टोल प्लाजा के पास लोगों की चेकिंग की जा रही थी। एक ही क्षेत्र में दो दिनों में एनकाउंटर की एक जैसी घटना को उन्होंने महज इत्तेफाक बताया।