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STF नहीं दे सकी सुबूत, राष्ट्रद्रोह के आरोपी मुक्त

Thu, 09 Jan 2014 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्र के खिलाफ साजिश और देशद्रोह जैसे गंभीर मामलों में एसटीएफ द्वारा आरोपी बनाए गए मुईन और अलाउद्दीन के खिलाफ कोई साक्ष्य न होने पर अपर सत्र न्यायाधीश बीडी मिश्रा ने दोनों को आरोप मुक्त कर दिया।
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कोर्ट ने आरोपियों को आरोप मुक्त करने का आदेश जारी करते हुए कहा कि पत्रावली देखने से पता चलता है कि मुईन व अलाउद्दीन के खिलाफ न तो कोई दस्तावेजी साक्ष्य और न ही मौखिक साक्ष्य हैं।

विवेचक ने मात्र सह आरोपियों के बयान के आधार पर ही चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते।

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपियों के खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया होता है तो मुईन व अलाउद्दीन के खिलाफ चार्जशीट नहीं लगाई जाती।
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इसके पहले मुईन व अलाउद्दीन की ओर से आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली अर्जी देकर बताया गया कि उन्हें इस मामले से झूठा फंसाया गया है, जबकि वह न तो कभी लखनऊ आए न ही किसी गेस्ट हाउस में ठहरे।

आरोपियों ने ऐसा कोई आपराधिक कार्य नहीं किया है, जिससे भारत की अखण्डता व संप्रभुता को खतरा हो। उन्होंने कोई हथियार जमा नहीं किया और न ही उनके पास से कोई हथियार बरामद हुआ है।

मामले में कोर्ट ने अवैध हथियार रखने के आरोप में अजीजुद्दीन को 10 साल की सजा सुनाई थी। अजीजुद्दीन अंसार व तारिक परवीन ने पुलिस को बयान दिया था कि मुईन व अलाउद्दीन, दाउद व छोटा शकील गिरोह के सदस्य हैं।
कहा गया कि मात्र इन्हीं आरोपियों के बयान के आधार पर मुईन व अलाउद्दीन को आरोपी बनाकर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। सह आरोपियों के बयान के अलावा अन्य कोई साक्ष्य नहीं हैं।

एसटीएफ के निरीक्षक राजेन्द्र सिंह ने 2 जून 1999 को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एसटीएफ की टीम ने सूचना पर हजरतगंज स्थित लक्ष्मी गेस्ट हाउस में छापा मारा था, जहां पर एक एके-47 व मैगजीन के साथ अजीजुद्दीन उर्फ अजीज शेख उर्फ अब्दुल सत्तार और अकील को गिरफ्तार किया था।
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विवेचना के बाद कोर्ट में मुईन व अलाउद्दीन के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। अजीजुद्दीन व अकील के मामले में कोर्ट अपना निर्णय सुना चुकी है।
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