कफ सिरप कांड में एसटीएफ ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। अमित सिंह टाटा, भोला जायसवाल के बाद यह तीसरी बड़ी गिरफ्तारी है।
नशीले कफ सिरप सिंडीकेट के अहम सदस्य बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह को यूपी एसटीएफ ने मंगलवार सुबह गोमतीनगर विस्तार स्थित प्लासियो मॉल के पास से गिरफ्तार कर लिया। आलोक सिंह, पूर्व सांसद व पूर्वांचल के बाहुबली धनंजय सिंह का करीबी है। एसटीएफ की टीम उससे पूछताछ कर रही है।
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एसटीएफ ने मूल रूप से चंदौली व लखनऊ स्थित सुल्तानपुर रोड के पास रहने वाले आलोक सिंह के खिलाफ सोमवार को लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। हालांकि आलोक ने अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी। इस पर अदालत ने पुलिस से आख्या मांगी थी। इस मामले के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के साथ अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह सिंडीकेट का संचालन कर रहे थे। तीनों ही धनंजय सिंह के खास बताए जाते हैं। धनंजय सिंह के साथ उनकी तमाम फोटो और वीडियो एजेंसियों के लिए जांच का सबब बनती जा रही हैं। अब एसटीएफ इस सिंडीकेट के बाकी सदस्यों को तलाश रही है।
टाटा का दोहराया बयान
एसटीएफ की पूछताछ में आलोक सिंह ने अमित सिंह टाटा के दिए बयान को ही दोहराया है। उसने बताया कि आजमगढ़ निवासी विकास सिंह के जरिये वह शुभम जायसवाल से मिला था। शुभम का एबॉट कंपनी की फेंसेड्रिल कफ सिरप का शैली ट्रेडर्स के नाम से बड़ा कारोबार रांची में है। यह सिरप नशे में इस्तेमाल होता है, जिसकी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में काफी मांग है। इसकी तस्करी में बहुत फायदा है।
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लालच में आकर मैं और अमित सिंह टाटा तैयार हो गए। उन लोगों ने धनबाद में श्रेयसी मेडिकल एजेंसी के नाम से जनवरी 2024 में मेरी फर्म बनवा दी। इसका सारा काम शुभम, उसके पार्टनर और उनका चार्टर्ड अकाउंटेंट तुषार देखता था। धनबाद के बिजनेस में मैंने और अमित ने 5-5 लाख रुपये लगाए थे। बदले में हमें करीब 20-22 लाख रुपये मिले थे। बाद में हम दोनों के नाम से बनारस में भी ड्रग लाइसेंस लेकर फर्म खुलवाई गई। मेरे नाम मां शारदा मेडिकल के नाम से फर्म खुली थी। इसका भी करीब 8 लाख रुपये का मुनाफा मुझे शुभम के पार्टनर विकास सिंह व विशाल मल्होत्रा ने दिया था।