‘68,500 सहायक शिक्षकों के चयन के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स कम करने का निर्णय क्यों लिया गया...?’ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के इस सवाल पर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार ने जवाब दिया- मुझे नहीं पता यह निर्णय क्यों लिया गया। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने फिर पूछा कि क्या वे इस निर्णय से संबंधित कोई दस्तावेज साथ लाए हैं? प्रमुख सचिव ने इसका जवाब भी नकारात्मक दिया।
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जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस राजन रॉय की पीठ ने पूछा कि क्या उन्होंने निर्णय से जुड़े दस्तावेज देखे हैं? प्रमुख सचिव का जवाब इस बार भी वही रहा, ‘नहीं’। यह शर्मनाक स्थित हाईकोर्ट में उस समय उत्पन्न हुई जब खुद अदालत ने प्रमुख सचिव को क्वालिफाइंग मार्क्स कम करने के निर्णय पर जवाब देने के लिए तलब किया था।
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मामले में 24 जुलाई को हाईकोर्ट के एकल पीठ के एक निर्णय के खिलाफ अवनीश कुमार व अन्य ने अपील की थी। एकल पीठ ने न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स कम करने के सरकार के निर्णय को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को आदेश में कहा था कि सहायक शिक्षकों की योग्यता के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स कम करने का आखिर क्या उद्देश्य हो सकता है? स्थायी अधिवक्ता इसका जवाब नहीं दे पाए थे।
नाराज कोर्ट ने कहा 'तलब किए गए है, निर्णय देखने की जहमत तक नहीं उठाई'
प्रमुख सचिव बेसिक ने कोर्ट के समक्ष बताया कि उन्हें मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने यह नहीं बताया था कि दस्तावेज कोर्ट लेकर आने हैं। कोर्ट ने कहा कि आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि अपने को तलब किए जाने के बावजूद खुद प्रमुख सचिव ने आदेश देखने की जहमत तक नहीं उठाई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल चयन प्रक्रिया इस अपील पर निर्णय के अधीन रहेगी।