लखनऊ। अखिल भारतीय उत्तराखंड महासभा का 18वां स्थापना दिवस सप्रू मार्ग स्थित उद्यान भवन सभागार में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने माहौल में पर्वतीय रंग बिखेरे। मुख्य अतिथि महासभा के संरक्षक योगी राकेश नाथ और राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार वीरेंद्र दत्त सेमवाल की मौजूदगी में गोष्ठी भी हुई। इसका विषय था देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता एवं गौरव को बनाये रखने में हमारी भूमिका।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भवान सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंडी समाज के लोग जहां भी रहते है अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं। उत्तराखंड के गौरव व पवित्रता बनाए रखने के लिए महासभा राज्य सरकार को एक प्रत्यावेदन देगी। 17 प्रदेशों में महासभा स्थापना दिवस मना रही है, अन्य प्रदेशों में भी जल्द अपनी इकाइयां गठित करेगी।
अन्य वक्ताओं में साहित्य, पत्रकारिता और रंगमंच से जुड़े जगदीश चंद जोशी, रणकर्मी ललित सिह पोखरिया, डॉ. किरन काले, महावीर खन्तवाल और बच्ची सिह डोलिया ने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी समीक्षक की भूमिका पूर्व सूचना आयुक्त अजय उप्रेती ने निभाई। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हेमवंत सिह गड़िया, प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र बिष्ट, लखनऊ इकाई के अध्यक्ष नारायण जोशी व महासचिव जगदीश बुटोला आदि मौजूद रहे। समाज के लिए उत्कृष्ट काम कर रहे सुंदर पाल सिंह और महेश चंद्र जोशी को सम्मानित किया गया।
रंगारंग प्रस्तुतियों में दिखे पहाड़ के रंग
इस दौरान रंगारंग प्रस्तुतियों में पहाड़ के रंग दिखे। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलित कर व गणेश वन्दना - जय गणेश जय गणेश देवा... की वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई जिसमें रीमा वांणगी, महिमा सिह, रेनू बोरा व रुचिका सिंह ने भावपूर्ण नृत्य किया। बलवंत वांणगी व प्रेम सिह बिष्ट के संयोजन व निर्देशन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। हरेला चौमासी घसेरी गीत पंचनाम देवता की जय जयकारा..., ठंडमाठू चौमास... झुमैलो नृत्य की प्रस्तुति शानदार रही। इसमें पुष्पा सामंत, नीलम जुयाल, मालती रावत, रजनी राणा, बीना नेगी ने नृत्य किया। झोड़ा चौफुला नैनीताल ठन्डो पाणी... व झनकाफुना में हेमा वांणगी, सीता रावत, गीता पांडेय, हेमा जोशी, ममता आर्या, हेमा, कृष्णा, पीयूष, रोशनी दक्ष, जानकी धना ने और प्रेम सिंह ग्रुप के नृत्य कलाकार सीता सेलाकोटी, द्रोपती मेहर, अम्बा बिष्ट, पुनीता तिवारी व नन्दी देवी ने प्रस्तुति दी। संचालन छाया पंत ने किया। युवराज सिंह परिहार, पूरन सिह बिष्ट, राजेन्द्र जुयाल, मनीष रावत, सोमेन्द्र बिष्ट, दिलीप सिंह, शंकर ध्यानी, हरपाल गड़िया, महेंद्र राणा और हेमवंत सिह गड़िया आदि का सहयोग रहा।