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डेंगू से मौतों के लिए अफसर दोषी, सब कमीशनखोरी में लगे

Mon, 29 Aug 2016 12:57 PM IST
मनीष सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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रव‌िदास मेहरोत्रा - फोटो : demo pic
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राजधानी समेत सूबे में डेंगू से मौतों के लिए मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री रविदास मेहरोत्रा ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने साफ कहा है कि इनकी लापरवाही और उदासीनता से डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और मौते हो रही हैं। 
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सब कमीशनखोरी में लगे हैं और बेखौफ हैं उन्होंने कहा है कि कुछ अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही हैं इसके बावजूद सब घपले घोटाले मे लगे हैं पूरी सिस्टम ही खराब हो चुका है। निर्देशों का भी किसी पर असर नहीं हो रहा। अमर उजाला से विशेष बातचीत में र‌विदास ने यह बात कही..

डेंगू जानलेवा हो चुका है, पर स्वास्थ्य विभाग मानने को तैयार नहीं है?
जुलाई में ही संक्रामक रोग सेल और संचारी रोग निदेशक को निर्देश दिया था कि डेंगू, मलेरिया और जेई से निपटने के इंतजाम कर लें बैठक में हामी तो सबने भर दी।, पर उन्होंने अगर जिम्मेदारी निभाई होती तो ऐसी स्थिति नहीं होती।
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स्वास्थ्य विभाग के अफसर जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे हैं? 
सीधा कारण हैं कि जिम्मदार अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। सब घपला करने में लगे हैं अधिकारी होने का मतलब बंद कमरे में कागज पर हस्ताक्षर करना नहीं होता हैं। अस्पताल पहुंचने वो मरीजों के बीच जाना होगा तब जाकर स्थिति सुधरेगी। ऐसे लापरवाह अफसरों पर सख्ती से कार्रवाई की जरूरत है।

डेंगू की रोकथाम के लिए कोई खास इंतजाम क्यों नहीं किया गया ?
संक्रामक रोग रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। डेंगू का लार्वा खाने वाली मछली गंबोजिया खरीदने के लिए भी कहा गया है। गरीब, झुग्गी झोपड़ी और असहाय जनता को मुफ्त में मेडिकेटेड मच्छरदानी देने के आदेश हैं लेकिन अफसर पूरा मामला दबाए बैठे रहे। संक्रामक रोग से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम अफसरों में कोई तालमेल नहीं है। अधिकारियों द्वारा पैदा किया गया सिस्टम का यही लोच जनता पर भारी पड़ रहा है।

लखनऊ में डेंगू से मौतें हो रही हैं और सीएमओ चुप्पी साधे हैं ?
सीएमओ को सेवा विस्तार दिया गया वह अपनी जगह है। लेकिन जनता को सुरक्षित सेहत से मतलब है। हकीकत ये है कि कोई भी अपनी कुर्सी की जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। मलेरिया इकाई में सिगरेट और शराब की बोतलें पड़ी हैं। 30 बेड के चौपड़ बीएमसी में दस बेड पर एड्स नियंत्रण सोसाइटी का कब्जा है। अल्ट्रासाउंड बंद है। क्या ये सब सीएमओ को पता नहीं है। लेकिन ऊपर से लेकर नीचे तक सब अधिकारी मिले हैं और सरकारी योजनाओं का बट्टा लगा रहे हैं।
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जनता की लड़ाई लड़ता हूं, अन्याय मुझे बर्दाश्त नहीं

डेमो
23 अगस्त को डेंगू के 117 मरीज थे, 27 को 326 हो गये, कैसे ?
अधिकारी आंकड़ों के हेर-फेर में माहिर हैं। अभी कुछ दिन पहले की की बात है। एनएचएम अधिकारियों से टीकाकरण का जवाब मांगा तो पता चला कि 80 फीसदी टीकाकरण हो रहा है। बीस फीसदी ने अपनी चूक छुपाने के लिए बता दिया।

ये अधिकारी कभी 100 परसेंट काम नहीं करेंगे। क्योंकि आप जनता से पूछेंगे तो उनकी पोल खुल जाएगी। इसी तरह डेंगू को लेकर है। हर किसी का अपना आंकड़ा है जबकि मौतें लगातार हो रही हैं और अधिकारी एक-दूसरे को बचाने के लिए जनता की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

प्रमुख सचिव ने प्रेस वार्ता की, संचारी निदेशक को डेंगू का आंकड़ा पता नहीं था ?
प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डेंगू को लेकर बैठक कर रहे थे। संचारी रोग निदेशक उसमें थे और उन्हें आंकड़ा नहीं पता था तो इससे सच्चाई सामने आ गयी कि महकमा डेंगू को लेकर कितना गंभीर है। संचारी रोग निदेशक और सीएमओ के साथ स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी ही डेंगू के लिए जिम्मेदार हैं। आंकड़ों के जाल में उलझाकर जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

लोहिया अस्पताल में वेंटिलेटर यूनिट के लिए 63 लाख मिले,  लेकिन यूनिट नहीं लगी।
लोहिया अस्पताल में मशीन खरीदने और टेंडर प्रक्रिया का काम करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की है। एक साल बाद भी मशीन इसलिए नहीं खरीदी गयी क्योंकि अफसरों को कमीशनखोरी की लत लग गयी है। अच्छा कमीशन नहीं मिल रहा होगा इसलिए टाला जा रहा है। इसकी जानकारी मांगी जाएगी। 

सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हालत बिगड़ती है तो इलाज की बजाय चलता कर दिया जाता है ?
सरकारी अस्पतालों में सभी तरह के संसाधन हैं, बस कोई काम नहीं करना चाहता। विभाग के बड़े अधिकारी सख्ती दिखाएंगे तो अस्पतालों के निदेशक, सीएमएस और एमएस मरीजों से अभद्रता पर रोक लगाएंगे। जो दवा अस्पताल में नहीं है उसकी लोकल पर्चेज की जानी चाहिए। सरकार के लिए अब सीमित समय है। जनता के लिए जितना बेहतर हो सकेगा, अपने प्रयास से करूंगा। 

लखनऊ मध्य क्षेत्र से विधायक और मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री रविदास मेहरोत्रा कहते हैं कि ‘मैं जनता की लड़ाई लड़ता हूं, अन्याय मुझे बर्दाश्त नहीं। संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन की मांग को लेकर बीस महीने जेल में रहा हूं। आज सरकार में मंत्री हूं तो भी जनता के हक की लड़ाई लड़ रहा हूं। ध्वस्त हो चुकी व्यवस्था ने आम लोगों का जीवन मुश्किल किया है। इसे सुधारना होगा, जब तक सिस्टम नहीं सुधरेगा आमजन की परेशानी कम नहीं होगी। ’
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