राजधानी समेत सूबे में डेंगू से मौतों के लिए मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री रविदास मेहरोत्रा ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने साफ कहा है कि इनकी लापरवाही और उदासीनता से डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और मौते हो रही हैं।
सब कमीशनखोरी में लगे हैं और बेखौफ हैं उन्होंने कहा है कि कुछ अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही हैं इसके बावजूद सब घपले घोटाले मे लगे हैं पूरी सिस्टम ही खराब हो चुका है। निर्देशों का भी किसी पर असर नहीं हो रहा। अमर उजाला से विशेष बातचीत में रविदास ने यह बात कही..
डेंगू जानलेवा हो चुका है, पर स्वास्थ्य विभाग मानने को तैयार नहीं है?
जुलाई में ही संक्रामक रोग सेल और संचारी रोग निदेशक को निर्देश दिया था कि डेंगू, मलेरिया और जेई से निपटने के इंतजाम कर लें बैठक में हामी तो सबने भर दी।, पर उन्होंने अगर जिम्मेदारी निभाई होती तो ऐसी स्थिति नहीं होती।
स्वास्थ्य विभाग के अफसर जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे हैं?
सीधा कारण हैं कि जिम्मदार अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। सब घपला करने में लगे हैं अधिकारी होने का मतलब बंद कमरे में कागज पर हस्ताक्षर करना नहीं होता हैं। अस्पताल पहुंचने वो मरीजों के बीच जाना होगा तब जाकर स्थिति सुधरेगी। ऐसे लापरवाह अफसरों पर सख्ती से कार्रवाई की जरूरत है।
डेंगू की रोकथाम के लिए कोई खास इंतजाम क्यों नहीं किया गया ?
संक्रामक रोग रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। डेंगू का लार्वा खाने वाली मछली गंबोजिया खरीदने के लिए भी कहा गया है। गरीब, झुग्गी झोपड़ी और असहाय जनता को मुफ्त में मेडिकेटेड मच्छरदानी देने के आदेश हैं लेकिन अफसर पूरा मामला दबाए बैठे रहे। संक्रामक रोग से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम अफसरों में कोई तालमेल नहीं है। अधिकारियों द्वारा पैदा किया गया सिस्टम का यही लोच जनता पर भारी पड़ रहा है।
लखनऊ में डेंगू से मौतें हो रही हैं और सीएमओ चुप्पी साधे हैं ?
सीएमओ को सेवा विस्तार दिया गया वह अपनी जगह है। लेकिन जनता को सुरक्षित सेहत से मतलब है। हकीकत ये है कि कोई भी अपनी कुर्सी की जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। मलेरिया इकाई में सिगरेट और शराब की बोतलें पड़ी हैं। 30 बेड के चौपड़ बीएमसी में दस बेड पर एड्स नियंत्रण सोसाइटी का कब्जा है। अल्ट्रासाउंड बंद है। क्या ये सब सीएमओ को पता नहीं है। लेकिन ऊपर से लेकर नीचे तक सब अधिकारी मिले हैं और सरकारी योजनाओं का बट्टा लगा रहे हैं।