लखनऊ। हाईकोर्ट ने अर्जुनगंज में सेना के फायरिंग रेंज में अतिक्रमण के मामले में राज्य सरकार को वैकल्पिक जमीन के चिह्नीकरण की स्थिति बताने को कहा है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश ब्रिगेडियर तिरबनी प्रसाद की 2011 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। न्यायालय ने पूछा कि प्रस्तावित वैकल्पिक स्थान अब तक चिह्नित हुआ है या नहीं। सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।
वहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि लखनऊ मंडल में ही सेना को दूसरी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह जमीन युद्धाभ्यास और मैदानी फायरिंग के लिए होगी। मौजूदा रेंज में शॉर्ट रेंज हथियारों की फायरिंग जारी रहेगी।
अतिक्रमण पर नाराजगी
कोर्ट ने वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आदेश दिया। न्यायालय ने पूर्व में सेना की जमीन पर अतिक्रमण पर नाराजगी जताई थी। राज्य सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठे थे। केंद्र सरकार ने बताया कि अर्जुनगंज रेंज में अतिक्रमण से सेना लॉन्ग रेंज हथियारों की ट्रेनिंग नहीं कर पा रही। केंद्र ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद लंबी दूरी के हथियारों की ट्रेनिंग को सेना की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया।